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शिक्षक तबादलों में किसकी चलेगी पंचायती

7 वर्ष पहले
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पंचायतराजमें नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों में किसकी पंचायती चलेगी? इसे लेकर शिक्षा विभाग में बहस छिड़ चुकी है। निदेशालय को तबादलों की गाइड लाइन का इंतजार है।

सरकार के नियमों को देखें तो पंचायत और प्रारंभिक शिक्षा के शिक्षकों के तबादलों की कमान स्कूल शिक्षा विभाग के पास ही है। पंचायतराज में शिक्षकों के तबादलों को लेकर पूर्व में भी विवाद हो चुका है। कांग्रेस सरकार के समय समानीकरण की आड़ में बड़ी संख्या में तबादले हुए थे। सालों से दूर-दराज के गांवों में कार्यरत शिक्षकों को अब शहर के नजदीक पहुंचने की उम्मीद है। सरकार ने फिलहाल तबादलों को लेकर कोई गाइड लाइन जारी नहीं की है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक भी दो दिन से बीकानेर में ही डेरा डाले हैं। निदेशालय कर्मचारियों को कैंप की सूचना का इंतजार है। उधर, शिक्षक आंध्र प्रदेश की तर्ज पर नीति के अनुसार तबादलों की मांग कर रहे हैं। प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री महेंद्र पांडे ने तबादले शिक्षा विभाग से ही करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2002 में पंचायत समितियों से हुए तबादले विरोध के कारण निरस्त करने पड़े थे।

पहले से बने हुए हैं नियम

राज्यमें दो अक्टूबर 2010 को प्रारंभिक शिक्षा पंचायतीराज विभाग को हस्तांतरित की गई थी। पंचायत और जिला परिषद स्तर पर तबादलों के अधिकार वहां की प्रशासन एवं स्थापना समिति को दिए गए थे, जबकि अंतरजिला तबादलों के लिए पैतृक विभाग को ही पूरे अधिकार दिए गए। इसके लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की अनुमित लेना अनिवार्य किया गया था। उसके बाद पंचायतीराज विभाग ने 14 मार्च 2011 को एक आदेश जारी कर पंचायत को हस्तांतरित कार्मिकों के शहर से शहर, शहर से गांव और गांव से शहरी क्षेत्र में तबादले के अधिकार पैतृक विभाग को दे दिए। राजस्थान रूल्स फॉर बिजनेस से प्राथमिक और प्रारंभिक शिक्षा पंचायतीराज विभाग के स्थान पर स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन करने का संशोधन कर दिया गया। उसके बाद जिला परिषदों से भर्ती होने वाले तृतीय श्रेणी शिक्षकों के सेवा प्रकरण स्कूल शिक्षा विभाग की क्रियान्वित कर रहा है।