बीकानेर | बीकानेर केपीबीएम शिशु हॉस्पिटल में डेढ़ महीने पहले मिले विकृत, अनाथ बच्चे ‘अजूबा’ ने जयपुर के जे.के.लोन हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया।
शरीर के अधिकांश अंगों से विहीन इस बच्चे को जिंदा रखने के लिए कई तरह के ऑपरेशन की जरूरत थी। चूंकि ये ऑपरेशन बीकानेर में संभव नहीं थे इसीलिए जयपुर भेजा गया था। वहां पहुंचते ही उसकी स्थिति बिगड़ चुकी थी और लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर ही था। ऐसे में कोई भी ऑपरेशन होता उससे पहले ही उसकी मौत हो गई।
‘अजूबा’ को 7 अगस्त 2014 को अज्ञात व्यक्ति पीबीएम शिशु हॉस्पिटल में छोड़ गया था। यहां के डाक्टरों के लिए भी यह अविकसित इंसानी बच्चा हैरानी पैदा कर रहा था लेकिन उन्होंने इसे चैलेंज और सेवाभाव से लिया।
एक महीने से अधिक समय तक जीवित रहा तो इसके जिंदा रहने की संभावनाएं जाग उठी। इसीलिए कमेटी बनाकर उसकी रिपोर्ट के आधार पर ऑपरेशन के लिए जयपुर भेजा गया। जेके लोन हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डा.एस.पी.शर्मा का कहना है, यहां वह गंभीर हालत में पहुंचा था। ऑपरेशन से पहले मेडिसिन विभाग में रखकर उपचार दिया गया। लगातार ऑक्सीजन पर था। ऐसे बच्चे आमतौर पर बच नहीं पाता, वही हुआ।
ऐसा केस पहले नहीं देखा
जेकेलोन हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट डा.एस.पी.शर्मा का कहना है, विकृत बच्चे तो इस हॉस्पिटल में आते रहते हैं लेकिन ऐसा केस मैंने पहले नहीं देखा। उसके हाथ-पांव नहीं थे। लिंग का पता नहीं चलता। पेट के हिस्से बाहर आए हुए और यूरीन की थैली नहीं। तालू गायब और रीढ़ की हड्डी में भी डिफेक्ट था। चिकित्सा विज्ञान के लिहाज से यह केस टेट्रो फेको मेलिया विद मल्टीपल बर्थ डिफेक्ट एन एक्टोपिया का था। इसमें जान बचना असंभव था।