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सहायक कर्मचारियों के 25 पदों को भूल गया विवि

7 वर्ष पहले
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एकतरफ तो सरकार विवि को नए पद नहीं देती लेकिन महाराजा गंगासिंह विवि को दिए तो वह भूल गया कि उसे ये पद भरने भी हैं। तीन साल पहले लिपिक और सहायक कर्मचारियों पद सरकार ने स्वीकृत किए थे। तत्कालीन कुलपति ने इन्हें भरने के लिए आवेदन मांगे।

लिपिक भर्ती हो गई लेकिन सहायक कर्मचारियों की भर्ती यह कहकर रोक दी गई कि स्थायी कुलसचिव नहीं है। छह महीने तक स्थायी कुलपति नहीं मिल। बीते लंबे समय से स्थायी कुलपति और कुलसचिव दोनों हैं फिर भी भर्ती प्रक्रिया एक कदम आगे नहीं बढ़ी जबकि यही विवि टीचिंग पदों के लिए सरकार से लेकर राजभवन तक दौड़ भाग कर रहा है। अब तो लाेग भी सवाल उठाने लगे हैं कि जब विवि बिना सहायक कर्मचारियों के काम चला रहा है तो क्यों स्वीकृत किए गए पदों को समाप्त कर दिया जाए क्योंकि विवि को इसकी जरूरत महसूस नहीं हो रही है। इन पदों की भर्ती की जिम्मेवारी तो कुलसचिव लेना चाहते हैं और ही कुलपति। तत्कालीन कुलपति प्रो.जी.आर.जाखड़ ने इन पदों को स्वीकृत कराने के लिए एड़ीचोटी का जोर लगाया था मगर विवि उन प्रयासों की कद्र तक नहीं कर रहा।

जिन लोगों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था उनमें भी बेचैनी होने लगी है। हालांकि आरपीएससी से इस पर भी चर्चा हो रही है कि क्या इतने पुराने आवेदनों पर भर्ती हो सकती है। यदि नहीं तो क्या फिर से आवेदन मांगे जा सकते हैं। कुलपति प्रो.चंदकला पाडिया का कहना है कि सहायक कर्मचारियों की भर्ती पर विचार किया जा रहा है मगर आवेदनकर्ता विवि के इस जवाब को पिछले दो साल से सुन रहे हैं।