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शिक्षा के निजीकरण का विरोध

7 वर्ष पहले
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राज्यसरकार शिक्षा के प्रारंभिक ढांचे में सुधार का दिखावा कर रही है, असल में सरकार शिक्षा में निजीकरण को बढ़ाव दे रही है। जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील की प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में शिक्षक नेताओं ने शिक्षा और शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मसलों पर विचार-मंथन किया। शिक्षकों की एक दिवसीय कार्यशाला रविवार को आर.के.भवन में आयोजित की गई। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश प्रसाद ढाका ने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए ही स्कूल एकीकरण किया है। जिसके तहत राज्य की 17 हजार सरकारी स्कूल बंद हो गई। वर्तमान सरकार शिक्षक समुदाय को अनदेखा कर रही है। जिसका खामियाजा सरकार को भुगताना होगा।

उन्होंने कहा कि 26 27 सितंबर को प्रस्तावित शैक्षिक सम्मेलन के दौरान शिक्षकों पर टिप्पणी करने वाले मंत्रियों की शव यात्रा निकाली जाएगी। शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेशाध्यक्ष शिशुपाल पुनिया ने सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन की रणनीति तैयार करने का आह्वान किया। कार्यशाला में पारदर्शी तबादला नीति, स्कूलों में नामांकन वृद्धि, आठवीं बोर्ड परीक्षा अनिवार्य करने, जिला समान परीक्षा व्यवस्था लागू करने संबंधी मसलों पर भी विचार-मंथन किया गया। कार्यशाला में बनाराम चौधरी, सत्यनारायण शर्मा, पुरखाराम चौधरी, पूनमचंद बिश्नोई, गुरचरण सिंह मान, मोहम्मद इलियास जोइया, यतीश वर्मा के अलावा अजमेर, उदयपुर, अलवर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर, जयपुर से प्रतिनिधि शामिल हुए।

आर के भवन में आयोजित कार्यशाला में शिक्षक चेतना पत्र का विमोचन करते जगदीश प्रसाद ढ़ाका अन्य।

शिक्षक चेतना पत्र का विमोचन

कार्यशालाके दौरान शिक्षक संघ प्रगतिशील के मुख्य पत्र शिक्षक चेतना का विमोचन किया गया। संगठन के गुरचरण सिंह मान ने बताया कि स्व.गिरधारी लाल व्यास एवं स्व. राजकुमार विलियम की स्मृति में संगठन के इस मुख्य पत्र का विमोचन किया गया है। विमोचन कार्यक्रम में संगठन पदाधिकारियों के अलावा कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष जयकिशन पारीक, पूर्व अध्यक्ष सत्यनारायण पंवार, शेखावत संघ के महामंत्री रामस्वरूप चतुर्वेदी आदि शामिल हुए।