बीकानेर. पीबीएम शिशु हॉस्पिटल में चार साल से चल रहे कुपोषण उपचार केन्द्र (एमटीसी) में अति कुपोषित बच्चों का उपचार तो हुआ मगर तो यहां किसी ने बच्चों को रैफर किया और ही कोई स्वास्थ्य कार्यकर्ता लेकर आए। जिन बच्चों को यहां भर्ती किया उनमें से अधिकांश के परिजनों को मनरेगा की दर से दिया जाने वाला भुगतान भी नहीं हुआ।
इतना ही नहीं सरकार और यूनिसेफ ने इस सेंटर को बीकानेर के अलावा पांच जिलों में एमटीसी की सुपरवाइजिंग का जिम्मा भी दे रखा है। जैसलमेर, बाड़मेर, चूरू, श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिलों के लिए बनाए गए नोडल या रिसोर्स अधिकारियों को वहां मॉनीटरिंग, ट्रेनिंग, इंस्पेक्शन का काम करना है। इन अधिकारियों के दौरों के बिलों पर भी सवालिया निशान लग गए। ऐसे में अब पीबीएम हॉस्पिटल प्रशासन मॉल न्यूट्रीशन सेंटर के क्रियाकलापों को लेकर सतर्क हुआ है। सारी व्यवस्थाओं की नए सिरे से समीक्षा हो रही है। शुक्रवार को भी इस संबंध में हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट ने पूरी रिपोर्ट मांगी है।
कुपोषित बच्चों को लाने, उन्हें हॉस्पिटल में दवाइयों के साथ ही फ्री खाना देने, उनके परिजनों के रहने-खाने का बंदोबस्त करने के साथ मनरेगा की दर से परिजन को भुगतान करने का प्रावधान भी है। पीबीएम शिशु हॉस्पिटल में इसके लिए अगस्त 2010 से एमटीसी चल रहा है।
जिले के सभी केन्द्रों पर ऐसे ही हालात, इलाज के लिए हॉस्पिटल आए थे बच्चे
प्रावधान यह है कि इस सेंटर पर उन कुपोषित बच्चों का इलाज होगा जिन्हें गांवों से रैफर किया जाएगा या आशा सहयोगिनी चिह्नित करके लाएगी। इसके लिए आशा सहयोगिनी को आने-जाने का किराया प्रति बच्चा लाने के लिए 150 रुपए अलग से देने का प्रावधान भी है। इस अवधि में पीबीएम हॉस्पिटल में बच्चों का उपचार तो हो रहा है लेकिन इनमें से अधिकांश को तो किसी ने रैफर किया और ही कोई स्वास्थ्य कार्यकर्ता लेकर आया। डाक्टरों का कहना है, जो बच्चे हॉस्पिटल में किसी अन्य बीमारी का इलाज करवाने पहुंचे थे उन्हीं में से कुपोषितों की पहचान कर यहां इलाज किया गया।
जिले के श्रीडूंगरगढ़, लूणकरणसर केन्द्र पर चल रहे कुपोषण उपचार केन्द्रों पर वित्तीय वर्ष में अभी तक एक भी बच्चे का इलाज नहीं हुआ।
कुपोषित बच्चे तो सामुदायिक केन्द्रों पर बने एमटीसी में पहुंच रहे हैं ही इन्हें पीबीएम रैफर किया जा रहा है। यह गंभीर मामला है। इस बारे में सोमवार को ही पूरी रिपोर्ट लेकर कार्रवाई करूंगा।'' -
डा.देवेन्द्रचौधरी, सीएमएचओ
बच्चे कुपोषित हैं, हॉस्पिटल नहीं पहुंचते
आरसीएचओडा.रमेश गुप्ता कहते हैं, अगस्त के पहले पखवाड़े में चले अभियान के दौरान जिलेभर में 579 कुपोषित बच्चे चिह्नित हुए। उपचार केन्द्रों पर ये बच्चे पहुंचे या नहीं इसकी जानकारी अब फॉलोअप रिपोर्ट में लेंगे। वैसे सभी ब्लॉक सीएमओ से इस बारे में सोमवार को ही जानकारी लेंगे।