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माँ सारदा के उपदेश आज भी प्रासंगिक

7 वर्ष पहले
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प्रेम, करूणा, त्याग और सेवा आदि से विभूषित माँ सारदा देवी का जीवन और सरल उपदेश आज भी प्रासंगिक है। यह बात एमएस कॉलेज की व्याख्याता डॉ.सुशीला कुमारी ओझा ने कही।

अवसर था करणी नगर स्थित श्रीरामकृष्ण आश्रम में माँ सारदा देवी के 162वें जन्मोत्सव का। ‘माँ सारदा की वर्तमान में प्रासंगिकता’ विषय पर बोलते हुए मुख्य वक्ता डॉ.सुशीला ओझा ने कहा, शब्दों द्वारा किसी को कष्ट नहीं देना, अप्रिय सत्य भी नहीं कहना, वाणी पर संयम जैसे माँ सारदा के उपदेश आज के दौरे में भी प्रासंगिक है। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ.प्रभा भार्गव ने माँ सारदा देवी के जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे। आश्रम सचिव अर्जुन सिंह और उप सचिव कैलाश सिंह पंवार ने भी विचार रखे। इससे पूर्व मंगला आरती से कार्यक्रम की शुरूआत हुई। दोपहर में नारायण सेवा के तहत झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को भोजन करवाया गया। नारायण सेवा में डॉ. अरुणा जांगिड़, विमला शर्मा, राम सिंह, राजाराम पांडे, मोती सिंह, सुरेंद्र सिंह, ओम सिंह इंदा, अशोक झा, अभिनव चौहान, अभिषेक आदि ने सहयोग किया।

उधर, श्रीरामकृष्ण कुटीर में माँ सारदा के जन्मोत्सव पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। मुख्य अतिथि डॉ. बसंती हर्ष ने कहा, माँ सारदा देवी का जीवन एक आदर्श है। वह जाति, संम्प्रदाय से ऊपर उठकर सभी की माँ थी। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. चित्रा पंचारिया ने माँ सारदा देवी के व्यक्तित्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में कुमारी श्यामा राजपुरोहित, सरोज तंवर कैलाश पुरोहित, नीरज शर्मा आदि ने विचार रखे। संस्था सचिव महादेव प्रसाद आचार्य ने बताया कि इस मौके पर कादम्बी ट्रस्ट बैंगलोर के सौजन्य से छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र और शॉल वितरित किए गए।

सांस्कृतिक सप्ताह कल से

बीकानेर. बिनानी कालेज में 15 दिसंबर से सांस्कृतिक खेलकूद सप्ताह जुनून आयोजित किया जाएगा। प्राचार्य ने बताया कि सप्ताह के तहत विभिन्न गतिविधियां प्रतियोगिताएं होंगी।

छात्रों का छात्रवृत्ति प्रदान करती मुख्य अतिथि डॉ. बसंती हर्ष अन्य।