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शिवबाड़ी, नागणेचीजी तथा देवी कुंड सागर का ब्यौरा भी दिया है सोढ़ी ने
शिवबाड़ी मंदिर के विषय में भी सोढ़ी हुक्म सिंह ने अपनी इस कृति में कुछ तथ्यात्मक जानकारियां दी है। उन्होंने लिखा है कि शिवबाड़ी बीकानेर शहर से 2 मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यहां पर भगवान महादेव के मंदिर का निर्माण महाराजा डूंगर सिंह के द्वारा सन् 1880 ई. में कराया था। उन्होंने लिखा है कि मंदिर के निकट स्थित बगीचे में एक तालाब है, जिसमें पानी अधिक समय तक नहीं रुकता है तथा यहां महाराजा के उपयोगार्थ कुछ भवन है। हर वर्ष की सावण सुदि सप्तमी को यहां पर एक मेला लगता है। बीकानेर शहर से शिवबाड़ी मंदिर के लिए एक पक्की सड़क भी बनी हुई है।
नागणी जी मंदिर के विषय में सोढ़ी हुक्म सिंह ने यह लिखा है कि , यह मंदिर बीकानेर शहर से डेढ़ मील दक्षिण-पूर्व में स्थित है। जब महाराजा बीकानेर हुआ करते है तब वे चेत सुदि सप्तमी तथा फाल्गुन सुदि सप्तमी तथा फाल्गुन सुदि एकादशी को इस मंदिर में दर्शनार्थ पधारते है। नागणी जी बीकानेर राजवंश की कुलदेवी है तथा प्रत्येक धार्मिक अवसर पर इनकी पूजा-अर्चना की जाती है।
देवी कुंड सागर के विषय में भी सोढ़ी हुक्म सिंह ने कतिपय तथ्यात्मक जानकारियां अपनी इस कृति में समाहित की है। वे लिखते है कि बीकानेर राजवंश का अंत्येष्टि-स्थल, कल्याण-सागर में राव बीका के पौत्र जैत सिंह (राव जैतसी) के समय से ही स्थित है। यह बीकानेर नगर से पांच मील पूर्व में स्थित है। इस तालाब के चहुं ओर कल्याण सिंह से डूंगर सिंह जी तक की छतरियां स्थित है। इन में से कई बहुत ही भव्य हैं और सभी गुम्बदों से अच्छादित है। इनके निर्माण में खारी का बलुआ पत्थर तथा मकराना का संगमरमर इस्तेमाल किया गया है। पास ही लगे मृत्यु स्मारक लेख पर नरेश संबंधी अंकन है जिनके चरणों की तरफ अग्रता क्रम में संबंधित नरेश की प|ियों, उनके पीछे वे नीचे उनकी उप-प|ियों का अंकन है जो उनके साथ सती हुई दिवंगत नरेश का नाम, मृत्यु तिथि और कतिपय मामलों में एक संस्कृत पंक्ति भी इन पर उत्कीर्ण की गई है। यह मृत्यु स्मारक लेख कई तथ्यात्मक सूचनाएं समाहित किए हुए है। (लगातार)