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गवर्नमेंट अपने हाथों में सकती थी धर्मादे की देखभाल

7 वर्ष पहले
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कुछ खास सूरतों में बीकानेर गवर्नमेंट के द्वारा धर्मादे की देखभाल को अपने हाथों में लिया जा सकता था। एतद्विषयक प्रावधान इस एक्ट की बाब-7 में कर दिए गए थे। इस बाब में दफा क्र. 31 से 33 तक की कुल तीन दफाएं थीं, जिनका ब्यौरा आगे दिया जा रहा है। दफा- 31 (1) : किसी खैराती या मजहबी धर्मादे के साथ सरोकार रखने वाले पांच या पांच से ज्यादा शख्सों या ऐसे धर्मादे के खुद ट्रस्टी, को अख्तियार होगा कि सुपरिंटेंडेंट को अर्जी दाखिल करके दरख्वास्त करे जिसमें यह गुजारिश हो कि श्रीजी साहब बहादुर की गवर्नमेंट किसी ऐसे धर्मादे की निगरानी और देखभाल अपने हाथ में लें। (2) ऐसी किसी दरख्वास्त के पाने पर, अगर कमेटी से मशविरा करने के बाद सुपरिंटेंडेंट की यह राय हो कि ऐसी गुजारिश मंजूर की जाए, तो वह मुआमले को रेवेन्यू मिनिस्टर साहब के पास हुक्म के वास्ते पेश करेगा।

दफा- 32 : अगर किसी वक्त किसी धर्मादे के ट्रस्टी का ओहदा खाली हो जाए और दफा-20 या 21 के अहकाम के मुताबिक उसकी पूर्ति कर देना सुपरिंटेंडेंट के लिए संभव हो, या किसी वक्‍त सुपरिंटेंडेंट को यह विश्वास करने की वजह हो और तहकीकात के बाद उसको यह निश्चय हो जाए कि धर्मादे का इंतजाम ऐसी बेजाब्तगी के साथ और गैर मुनासिब तौर पर किया जाता है कि उसका उद्देश्य निष्फल हो जाने की संभावना है और उसकी यह राय हो कि किसी ऐसे धर्मादे की निगरानी और देखभाल श्री जी साहब बहादुर की गवर्नमेंट को अपने हाथ में लेना चाहिए तो वह मामले को इसी तरह रेवेन्यू मिनिस्टर साहब को हुक्म के वास्ते पेश करेगा। (लगातार)