पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • जैन संस्कृति और संस्कारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान

जैन संस्कृति और संस्कारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
तेरापंथभवन में रविवार को जैन महासभा की ओर से समाज का सामूहिक क्षमतक्षामना पर्व और तप अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।

इस मौके पर मुनि पीयुष कुमार ने कहा, केवल क्षमा मांगने से नहीं, क्षमा करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैन संस्कृति और संस्कारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। जैन समाज के लोग अपनी संस्कृति को नहीं भूलें। आचार्य दिव्यानंद सूरी (निराला बाबा) ने कहा कि जहां विरोध है वहां क्षमा को कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले के विकास का दीप बुझ जाता है। उन्होंने कहा कि क्षमापना के दिन संकल्प करें कि एक-दूसरे का विरोध नहीं करेंगे। साध्वी चंद्रकला ने कहा कि विभिन्न समुदाय में मोक्ष के विभिन्न रास्ते बताए गए है लेकिन लक्ष्य उनका एक ही है।

उन्होंने कहा कि जिन व्यक्तियों के साथ राग-द्वेष होता है उनसे क्षमायाचना अवश्य करें। मुनि शांति कुमार ने कहा क्षमायाचना पथ दर्शन है। जैन जीवन का आकर्षण है। क्षमा वाणी से टूटा मन फिर से जुड़ जाता है। कार्यक्रम में साध्वी संकल्प, साध्वी सुभद्रा, साध्वी कलम प्रभा, साध्वी पुण्य प्रभा, जैन महासभा के अध्यक्ष इंद्रमल सुराणा, पूर्व महामंत्री जतनलाल दूगड़ आदि ने विचार रखे। संचालन जैन लूणकरण छाजेड़ ने किया।

जैन महासभा की ओर से आयोजित सामूहिक क्षमत-क्षामना में पहुंची साध्वीवृंद।