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महाजन की ओर बढ़ा पैंथर

7 वर्ष पहले
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तीनमहीने से लूणकरणसर क्षेत्र में धमाचौकड़ी मचा रहा पैंथर अब वन विभाग की कांबिंग से परेशान होकर आगे बढ़ने लगा है। मंगलवार को उसके पद चिन्ह महाजन की ओर हरियासर के आसपास देखे गए।

यह आरडी 33 से करीब 30 किलोमीटर दूर है। 48 घंटे से लूणकरणसर क्षेत्र में पैंथर अब दिखाई नहीं दे रहा। विभाग की टीम अब भी कांबिंग कर रही है लेकिन अंदरूनी तौर अधिकारी स्वीकार करने लगे हैं कि पैंथर को पकड़ना मुश्किल है क्योंकि दिन में वह नजर नहीं आता और रात को उसे बेहोश करने वाली पिस्टल से शूट करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में वह उसे इलाका छोड़ने के लिए मजबूर कर रहे हैं मगर बड़ा सवाल यह है कि भले ही वह इलाका छोड़ दे लेकिन आगे जहां भी जाएगा पशुओं के लिए मुश्किल ही होगा। चूंकि लंबे समय तक वह इस क्षेत्र में रह चुका है इस कारण यहां वापस भी सकता है। दूसरी ओर यह भी प्रयास है कि यदि पैंथर पकड़ में जाता है तो उसे गजनेर सेंचुरी में लाने का प्रयास किया जाएगा। एक मादा पैंथर भी क्षेत्र में लाई जाएगी ताकि गजनेर सेंचुरी पैंथर का परिवार फल-फूल सके।

पहली बार नजर आया पेंथर।

कुत्ते-सियार को भी समझ रहे पैंथर

लूणकरणसरमें पैंथर की खबर के बाद जिले भर में अब जंगली कुत्तों और सियार को भी लोग पैंथर और चीता समझने लगे हैं। बादनूं में दाे दिन पहले पैंथर की खबर फैली। वनविभाग की टीम ने उसकी जंगली कुत्ते के रूप में पहचान की। इसी तरह कीतासर में भी ऐसी ही अफवाह फैली लेकिन वह सियार निकला। बीती रात भी लिखमीदेसर में चीते की खबर फैली। एसडीएम से लेकर कलेक्ट्रेट तक हिल गया। वन अधिकारी रात में ही मौके पर पहुंचे लेकिन पद चिन्ह देखकर यहां भी जंगली कुत्ते के रूप में पहचान की। वन विभाग के अधिकारी इन अफवाहों से परेशान होने लगे हैं। चूंकि लूणकरणसर में पैंथर है इस कारण वह मौके पर रवाना हाेती है क्योंकि उस पैंथर के इस क्षेत्र में आने की आशंका है।