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- गजनेर के रमणीक स्थल पर भी लिखा है सोढ़ी हुक्म सिंह ने
गजनेर के रमणीक स्थल पर भी लिखा है सोढ़ी हुक्म सिंह ने
देवी कुंड सागर के किनारे पर हुआ यह निर्माण अपने आप में भव्यता लिए हुए है। स्थानीय निर्माण-सामग्री चूने तथा दग्गड़ आदि से बना यह भवन राजपरिवार द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले बगीचे (वर्तमान भारत स्काउट्स एंड गाइड्स ट्रेनिंग सेंटर) की ओर खुलता है। वर्षा ऋतु में जब यह सरोवर पानी से भर जाया करता था तब इसके जल को स्पर्श कर भवन में पहुंचने वाली शीतल हवा बड़ा ही मनोहारी अहसास प्रदान करती थी। उस समय नहाने के अतिरिक्त पीने के लिए भी इसी तालाब का पानी काम में लाया जाता था। इस भवन में निर्मित एक हॉल में भूमिगत सीढ़ियां थी जो नीचे सरोवर के तक पहुंचती थी। राजपरिवार की महिलाओं तथा जनाना के द्वारा सरोवर-स्नान के लिए इनका उपयोग किया जाता था। श्रावण-मास में यहां नगर के लोगों द्वारा सामूहिक गोठों का समायोजन थी खूब किया जाता था। सोढ़ी हुक्म सिंह ने अपनी कृति में बीकानेर रियासत के रमणीक स्थल गजनेर के विषय में भी कुछ महत्वपूर्ण तथ्यात्मक जानकारियां दी है। उन्होंने लिखा है कि बीकानेर नगर से कोई 20 मील दक्षिण-पश्चिम में बीकानेर राज्य के नरेशों का विशेष प्रिय और अति सुंदर स्थल गजनेर स्थित है। गजनेर झील को सोढ़ी ने अपनी कृति में एक तालाब बताया है जिसमें प्राय: पूरे वर्ष तक पानी रहता था। गजनेर महल तथा उसके बाग बगीचे इसी पानी से सींचे जाते थे। गजनेर तालाब के पानी पर नौकाएं भी चलती थी। जंगली बतखों का यहां पर जमावड़ा रहा करता था और इसके किनारों पर जंगली सूअर बहुतायत में पाये जाते थे। उल्लेखनीय है कि महाराजा गंगा सिंह के समय में गजनेर को एक राजसी सैरगाह तथा शिकार स्थल के रूप में विकसित कर एक रमणीक और मनोहारी स्थल बना दिया गया था। राज्य में पधारने वाले अति विशिष्ट लोगों का गजनेर अवश्य ही लाया जाता था। जो रेगिस्तान में नखलिस्तान का दृश्य पैदा करता था। (लगातार)