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एसएसए में संविदा पर लगे कार्मिक मानदेय को तरसे

7 वर्ष पहले
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एसएसएमें विभिन्न पदों पर लगे संविदा कर्मियों के मानदेय पर संकट खड़ा हो गया है। पिछले तीन महीनों से इन कार्मिकों को मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। जिससे संविदा कार्मिकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होने लगी है।

आक्रोशित कार्मिक सोमवार को जिला कलेक्ट्रेट परिसर में एकजुट हुए। मानदेय में हो रही देरी को लेकर कार्मिकों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने व्यवस्था में सुधार की मांग की। संविदा कार्मिकों ने बताया कि वर्ष 2007-08 से यह लोग सर्व शिक्षा अभियान में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से चौकीदार, वार्डन, कूक, चपरासी, संदर्भ शिक्षक आदि पदों पर कार्यरत है। प्लेसमेंट एजेंसी द्वारा प्रतिमाह एसएसए से वेतन आहरण करने के बावजूद कार्मिकों को समय पर मानदेय का भुगतान नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में जून, जुलाई और अगस्त माह का मानदेय बकाया चल रहा है। एजेंसी के संचालकों को कहने पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मजबूर होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। प्रदर्शन के बाद संविदा कार्मिकों के एक प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर को इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर समय पर मानदेय का भुगतान करवाने की मांग की है।

संविदा कार्मिकों ने एसएसए कार्यालय पहुंच कर भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में धीरज पारीक, विजय लक्ष्मी व्यास, मधू बाला, बालूराम, किसना राम आदि संविदा कर्मिक शामिल हुए।

बकाया मानदेय के लिए कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते एसएसए के कर्मचारी।

^संविदा कार्मिक जिस प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से लगे हुए है। उस एजेंसी को एसएसए की ओर से कार्मिकों के मानदेय के लिए जुलाई और अगस्त माह का भुगतान कर दिया गया है।\\\'\\\'

जोरावरसिंह, एडीपीसी,एसएसए

^संविदा कार्मिकों के मानदेय पर लगने वाला टैक्स सरकार वहन नहीं कर रही है। वहीं संविदा कार्मिक भी मानदेय से टैक्स की कटौती नहीं चाहते। इस कारण से मानदेय का भुगतान नहीं हो पाया है। प्रकरण के संबंध में जिला प्रशासन के माध्यम से एसएसए आयुक्त को अवगत करवाया गया है।\\\'\\\'

दिनेशपांडे, संचालक,प्लेसमेंट एजेंसी