आज के दौर में मौलिक शोध की जरूरत
महाराजागंगा सिंह विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित क्षमता निर्माण कार्यशाला का समापन मंगलवार को हुआ।
14 दिन तक चली इस कार्यशाला में शोध के विभिन्न आयामों पर विचार-मंथन हुआ। समापन समारोह की अध्यक्ष विश्वविद्यालय कुलपति प्रो.चंद्रकला पाडिया ने वर्तमान में मौलिक शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर शोध की बात कही। उन्होंने कहा, एक अच्छा मनुष्य ही अच्छा शोधकर्ता हो सकता है। मुख्य अतिथि महापौर नारायण चौपड़ा ने कहा, ऐसे आयोजन शिक्षा में गुणवत्ता लाने के साथ-साथ समाज के विकास में भी सहायक है।
विशिष्ट अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो.पूनम बावा ने शोध के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में निदेशक डॉ. एन.एस.राव, डॉ. छत्रसाल सिंह राघव, डॉ. अशोक कुमार महला, डॉ. बबीता जैन आदि ने विचार रखे। कार्यशाला सह निदेशक डॉ. अंबिका ढाका ने बताया कि 14 दिवसीय कार्यशाला में 30 से अधिक विषय विशेषज्ञों ने व्याख्यान देकर प्रतिभागियों को लाभान्वित किए।
कार्यक्रम को संबोधित करती एमजीएस विवि कुलपति प्रो. चंद्रकला पाडिया।