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सात घंटे में 20 घर, आठ बाड़े ध्वस्त

5 वर्ष पहले
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बीकानेर। संसोलाव तालाब के आगोर में हुए कब्जों पर मंगलवार को प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। बार-बार कहने के बाद भी नहीं हटे कब्जाें पर जेसीबी का प्रहार किया गया। इस दौरान 20 मकान और आठ बाड़े ध्वस्त किए गए।

एसडीएम ओमप्रकाश मेहरा के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला सुबह छह बजे ही मौके पर पहुंच गया। गाड़ियों की आवाज से मोहल्ले के लोगों की आंख खुली और वे संभल पाते उससे पहले ही जेसीबी की गरगराहट शुरू हो गई। लोग बाहर निकले और अधिकारियों के सामने गिड़गिडाते हुए बोले, हम यहां पर 30 साल से रह रहे हैं लेकिन अब प्रशासन हमें क्यों बेघर कर रहा है। लोगों के अनुनय-विनय और आक्रोश पर बेरुखी दिखाते हुए अधिकारी जेसीबी चालकों को आगे बढ़ने का आदेश देते रहे।

दोपहर दो बजे तक करीब 20 मकान आठ कब्जों से अटी आगोर की तकरीबन ढाई बीघा जमीन एक बार फिर समतल नजर आने लगी। दल में तहसीलदार रामचंद पंचार, कार्यवाहक सीओ सिटी ओमप्रकाश जोशी, कोटगेट एसएचओ संजय बोथरा, नयाशहर एसएचओ दरजाराम, यूआईटी के एक्सईएन भंवरू खां सहित रामजस पूनिया, राजेन्द्र सहारण, श्रवण चौधरी के अलावा आरएससी के जवान भी शामिल थे।

पापड़ बेलकर बनाया आशियाना आज रोटी भी नहीं हुई नसीब

आशीयाना उजड़ने पर 60 साल की छगनी देवी फफक पड़ी। वह तीस साल से यहां रह रही है। पति की मौत के बाद पापड़ बेलकर और लोगों के सहयोग से सिर ढकने के लिए कच्चा आशियाना बनाया था। छगनी देवी का कहना है कि अधिकारियों ने मुझ जैसी अबला पर भी रहम नहीं खाया। जेसीबी ने घर का सारा सामान बिखेर दिया।

चार जेसीबी ने ढहाया एक मकान

संसोलाव आगोर में हेतराम बिश्नोई के मकान को ढहाने में प्रशासन को चार जेसीबी लगानी पड़ी। इसमें एक जेसीबी खराब हो गई। तीन जेसीबी को एक मकान ध्वस्त करने में दो घंटे लगे। अभियान में पांच जेसीबी, छह टैक्टर एक डंपर लगाया गया।

कैसे चुकाएंगे बैंक का ऋण, मकान भी नहीं रहा
करणाराम बिश्नोई का कहना है कि जिस मकान को बनवाने के लिए बैंक से पांच लाख का लोन लिया अब वह ही नहीं रहा। तीन महीने पहले ही मकान तैयार हुआ था। यूआईटी ने यहां का पट्‌टा भी जारी किया हुआ है। विद्युत निगम 3200 रुपए की डिमांड राशि भी जमा करवा ली लेकिन कनेक्शन नहीं दिया। अब प्रशासन ने भी पट्‌टे के बाद भी मकान तोड़ दिया। हम पैसा कैसे चुकाएंगे ऊपर वाला ही जाने। और तो और प्रशासन ने पहले कभी भी हमें इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी।
हमने 10 दिनों से इन लोगों को अपना सामान हटाने का कह रहे थे। 2012 के बाद यहां पर निर्माण पर स्टै हैं लेकिन फिर भी लोग निर्माण करवाने से नहीं चूके। हम सोमवार रात नौ बजे फिर लोगों को मकान खाली करवाने के लिए कह कर गए थे। रही बात यूआईटी पट्‌टे की तो संबंधित लोगों ने उसमें जो पता बताया था वह भाटों का बास का है जबकि वास्तवविकता में वह इससे दूर है। ऐसे में प्रशासन की कहीं भी गलती नहीं है। अार.सी.पंचार, तहसीलदार

संसोलाव तालाब शहर की एेतिहासिक धरोहर है। राज्य सरकार ने इसके संरक्षण पर यूआईडीएसएसएमटी योजना में 77 लाख रुपए खर्च किए हैं। हाईकोर्ट ने भी 2012 में तारबंदी करके उसके अंदर निर्माण पर रोक लगा दी थी लेकिन कब्जेधारियों पर इसका भी असर नहीं हुआ। आखिर मंगलवार को प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए जो कदम उठाया वह शहर और धरोहर के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक है। संसोलाव तालाब एवं पर्यावरण संरक्षण समिति प्रशासन की कार्रवाई पर आभार जताती है। -मदन मोहन छंगाणी, संयोजक संसोलाव आगोर एवं पर्यावरण संरक्षण समिति।


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