शहर की फिज़ां में भरा है बासंती रंग
इस शहर की फिज़ां में कूट कूट कर बासंती रंग भरा है। यह कहना है साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा का। वे श्री जुबिली नागरी भंडार बीकानेर के 109 वें स्थापना दिवस समारोह के दूसरे दिन आयोजित हिन्दी, उर्दू और राजस्थानी कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्य अतिथि भवानीशंकर व्यास विनोद ने नागरी भंडार के 109 वर्षों की परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि इस संस्था के माध्यम से सात्विक सृजन हुआ है उन्होंने अभिनंदन बसंत तेरा अभिनंदन कविता से बसंत का अभिनंदन किया। विशिष्ट अतिथि मोहम्मद हनीफ शमीम बीकानेरी , रामनरेश सोनी ने भी अपनी रचनाओं से समा बांधा। संचालन करते हुए कमल रंगा ने राजस्थानी रचना प्रस्तुत की। आरंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया सचिव मुरारीलाल शर्मा ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी। आभार संस्था के अध्यक्ष शिक्षाविद विद्यासागर आचार्य ने ज्ञापित किया।
श्रीजुबली नागरी भंडार में आयाेजित कार्यक्रम में कविता पाठ करते राजेन्द्र जोशी।
इन्होंने सुनाई रचनाएं
इरशादअजीज , प्रमिला गंगल, उषा किरण सोनी, सरदार अली पडि़हार, राजाराम स्वर्णकार, राजेंद्र जोशी, अविनाश व्यास, कासिम बीकानेरी, बुनियाद हुसैन जहीन, जाकिर अदीब, मोनिका गौड़, मनीषा आर्य सोनी, आनंद वी आचार्य, गुलाम मइयुद्दीन माहिर, बाबूलाल छंगाणी, सुरेश हिंदुस्तानी, मौलाना अब्दुल वाहिद अशरफी, मधुरिमा सिंह, गिरधर दान रतनू, इंद्रा व्यास, नरपतसिंह सांखला, शमशेर अली, इसरार हसन कादरी, पुखराज सोलंकी, वेदिका सारस्वत, जगदीश उज्जवल, विवेक व्यास आदि ने अपनी रचनाएं सुनाई।