सीमा का प्रहरी भी बन सकता है साहित्य का सेवी : मेघवाल
सीमाका प्रहरी भी साहित्य का सेवी बन सकता है। कमांडेंट सत्येंद्र की पुस्तक से यह प्रमाणित होता है। यह बात सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने कही।
अवसर था जगत गुरू स्वामी जोगेंद्र आश्रम महाराज के सान्निध्य में बीएसएफ कमांडेंट कुंवर सत्येंद्र द्वारा लिखित पुस्तक ‘एक गौतम एक यशोधरा एक कथा’ के विमोचन का। सीमा सुरक्षा बल परिसर में हुए समारोह के मुख्य अतिथि सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने कहा, कमांडेंट सत्येंद्र ने इस पुस्तक के माध्यम से इस देश की दोहरी सेवा की है। समारोह के अध्यक्ष पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने कुंवर सत्येंद्र को सच्चे अर्थों में उच्च कोटी का लेखक बताया। विशिष्ट अतिथि कर्नल हेम सिंह शेखावत ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी द्वारा लिखित यह पुस्तक नई चेतना और जागृत का संदेश देती है। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार एवं राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कुंवर सत्येंद्र की लेखनी की प्रसन्नता करते हुए कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से गागर में सागर भरने का कुंवर सत्येंद्र ने सफल प्रयास किया है। बीएसएफ के डीआईजी पीयूष मोर्डिया और पुलिस अधीक्षक डॉ. अमनदीप सिंह कपूर ने कहा कि हमारे साथ के इस अभिनव प्रयास ने हमें भी कुछ लिखने के लिए प्रेरित किया है जो भविष्य की पीढ़ी के काम सके। लेखक का परिचय संयोजक हिंगलाज रतनू ने दिया। कार्यक्रम में बीएसएनएल के महाप्रबंधक आर.एन.माथुर ने भी विचार रखे। संचालन आकाशवाणी के अधिकारी श्याम पंवार ने किया। धन्यवाद वीना शर्मा पंवार ने ज्ञापित किया। इससे पूर्व अतिथियों एवं आयोजकों का शॉल,श्रीफल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मान किया गया।
एक गौतम एक यशोधरा एक कथा का विमोचन करते अतिथि।
यशोधरा ने नहीं लिया था आशीर्वाद
सीमासुरक्षा बल के ओपन एयर थियेटर में पुस्तक का विमोचन जगत गुरु स्वामी जोगेंद्र आश्रम महाराज के सान्निध्य में हुआ। जगत गुरु स्वामी जोगेंद्र ने कुंवर सत्येंद्र द्वारा लिखित पुस्तक की व्याख्या करते हुए कहा, गौतम बुद्ध ने अपना गृह त्याग कर संन्यास लिया। संन्यास लेने के बाद जब वह अपने नगर में गए तो सभी नगरवासी उनके दर्शन करने और आशीर्वाद लेने पहुंची। जबकि उनकी प|ी यशोधरा उनका आशीर्वाद लेने नहीं आई। गौतम बुद्ध नहीं चाहते थे कि उनकी प|ी संन्यास ले लेकिन उनसे मिलने आए। परंतु यशोधरा उसने मिलने नहीं आई।