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बीकानेर इतिहास दर्शन- डॉ. शिव कुमार भनोत

5 वर्ष पहले
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बीकानेर इतिहास दर्शन- डॉ. शिव कुमार भनोत

विभिन्न प्रशासनिक दायित्व भी सौंपे जाते थे, सामंतों को

पट्टायत के मुख्य कर्तव्यों तथा दायित्वों का उल्लेख उसके पट्टे में ही लिखा होता था। उसका प्रमुख दायित्व राज्य की सैन्य सेवा करना होता था, जिसके विवरण को पट्टे में दर्शा दिया जाता था। इसके अतिरिक्त उसके अन्य मुख्य कर्तव्यों में अपने पट्टा क्षेत्र से करों की वसूली करना तथा वहां स्थित आबादी को बनाये रखना भी शामिल था। जब कभी किसी पट्टायत की नियुक्ति किसी विशेष दायित्व या जिम्मेदारी के लिये की जाती थी, तब उससे इस बात की अपेक्षा की जाती थी कि वह पूर्ण कर्तव्यनिष्ठता और ईमानदारी से संबंधित दायित्व का निर्वहन करेगा। राज्य की समस्त सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व सामंतों पर ही था। महाराजा की अनुपस्थिति में राजधानी, गढ़ आदि की देखभाल तथा सुरक्षा का जिम्मा भी इन्हीं सामंतों में से किसी को सौंपा जाता था। प्रत्येक ठाकुर/सामंत को अपने कार्यों/दायित्वों के निर्वहन की सूचना समय-समय पर शासक को देते रहना पड़ता था। दरबार आयोजन के समय तथा महोत्सवों आदि में इन्हें उपस्थित रहना पड़ता था। विशेष रूप से दशहरा तथा शासक के जन्मदिवस के उत्सव में इनमें से कोई भी अनुपस्थित नहीं रह सकता था। हमें ऐसे पर्याप्त उल्लेख देखने को मिलते है कि, सामंतों को समय-समय पर राज्य प्रशासन के विभिन्न प्रशासनिक दायित्व भी सौंपे गये। मंत्री परिषद में मुसाहिब के पद पर श्रंगोत बीका ठाकुर पृथ्वीराज कुशल सिंह की नियुक्ति हुई थी। ठाकुर पृथ्वीराज ने महाराजा स्वरूप सिंह की बाल्यावस्था और दक्षिण में नियुक्ति के दौर में राज्य प्रशासन को संभाला था। ठाकुर कुशल सिंह ने दीवान मोहता बख्तावर सिंह के साथ मिल कर, महाराजा जोरावर सिंह की मृत्यु हो जाने के पश्चात शासक के अभाव में, राज्य प्रशासन का संचालन किया था। मुख्य सेनापति के दायित्व पर भी सामंतों की नियुक्तियां होती रहती थी। (लगातार)

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