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टेस्ट से चेक करेंगे हाईस्कूल एजुकेशन की हेल्थ

7 वर्ष पहले
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भरतपुर। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) कक्षा दसवीं की एजुकेशन की हेल्थ जांच एक टेस्ट लेकर करेगी। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जो सिलेबस स्टूडेंट्स को पढ़ाया जा रहा है वह उसे समझ में रहा है या नहीं दसवीं बोर्ड में ही ज्यादातर बच्चे फेल क्यों होते हैं। इस टेस्ट को नेशनल अचीवमेंट सर्वे नाम दिया है।

नौ मार्च को राज्यभर के 350 स्कूलों के स्टूडेंट, इन्हें पढ़ाने वाले टीचर स्कूल के प्राचार्य यह टेस्ट देंगे। भरतपुर में 13 धौलपुर में सात स्कूलों का चयन किया गया है। देश के विभिन्न बोर्ड के अधीन आने वाली माध्यमिक उच्च माध्यमिक स्कूलों की शिक्षा नीति में बदलाव के लिए इस वर्ष दसवीं कक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों स्कूलों का राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद सर्वे करवाया जाएगा। इस सर्वे के लिए सरकारी प्राइवेट माध्यमिक उच्च माध्यमिक स्तर के 350 स्कूलों का चयन किया गया है। यह सर्वे राजस्थान की इन सभी स्कूलों में 9 मार्च को सुबह 10 बजे एक साथ होगा।

सूची वेबसाइट पर भी

चयनितस्कूलों की सूची बोर्ड की वेबसाइट www.rajeduboard.nic.in पर अपलोड की गई है। सूची में शामिल स्कूलों के संस्था प्रधान अपने परीक्षा प्रभारियों को केंद्राधीक्षक के रूप में इसमें शामिल होने के लिए लगाएंगे।

^बेवसाइट पर स्कूलों की सूची डाली गई है। एनसीईआरटी के माध्यम से यह सर्वे कराया जाएगा। लखनपालसिंह,एडीपीसी रमसा

सिलेबस में हो सकता है बदलाव

सर्वेके लिए कराए जाने वाला टेस्ट रेंडम आधार पर होगा। यानी स्कूल में यदि 60 स्टूडेंट हाईस्कूल में हैं तो 45 को टेस्ट में शामिल किया जाएगा। एनसीईआरटी ने ऐसा इसलिए किया है कि ताकि इस टेस्ट में सभी तरह के छात्र शामिल हो सकें और स्कूल प्रबंधन केवल इंटेलीजेंट स्टूडेंट को ही शामिल नहीं करा सकें। टेस्ट का रिजल्ट नेगेटिव रहा तो एनसीईआरटी 10 वीं के सिलेबस में बदलाव कर सकती है। टीचरों की ट्रेनिंग पर भी विचार किया जा सकता है।

10 वीं में आधे से ज्यादा स्टूडेंट होते हैं फेल

पूरेदेश में 10 वीं के स्टूडेंट अधिक संख्या में फेल हो रहे हैं। इस कारण ड्रॉपआउट की संख्या बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए एनसीआरटी सर्वे करा रही है। ताकि यह पता चल सके कि निजी सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स को पढ़ाया जाने वाला सिलेबस उन्हें कितना समझ में रहा है। टीचर किस तरह स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं, यह जानने के लिए इनका भी टेस्ट लिया जाएगा।