विश्वविद्यालय की साइट पर अपलोड होंगी आंसर सीट
परीक्षादेने के बाद कम नंबर आने पर या फिर फेल होने पर परीक्षार्थी किसी पर आरोप नहीं लगा सकेंगे। विश्व विद्यालयों से जुड़ी परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पर अब परीक्षार्थी सवाल खड़े भी नहीं कर सकेंगे। पेपर सेटर प्रश्न पत्र तैयार करने के अलावा उनके स्टेंडर्ड उत्तर तैयार करेंगे और यूनिवर्सिटी प्रशासन को उत्तरों को खुद की वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा। यह विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इससे परीक्षार्थी अपना लिखा उत्तर देखकर खुद का असेसमेंट खुद कर सकेंगे।
इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के स्तर पर कवायद शुरु कर चुका है। राज्यपाल कल्याण सिंह ने ये व्यवस्था इस सत्र से लागू करने के लिए सभी 25 सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश दिए हैं। किसी प्रश्न के उत्तर में कौन से कितने तथ्य एवं स्टेप्स अपेक्षित हैं। इन निर्धारित एवं अपेक्षित तथ्यों और स्टेप्स के अंकित होने पर कितने अंक दिए जाने हैं, इसका भी स्पष्ट उल्लेख होगा। जो तथ्य और स्टेप्स मिसिंग हो उन पर कितने अंक काटे जाने हैं। इससे ये तय होगा। इसे उच्च शिक्षा विभाग ने मार्किंग स्कीम का नाम दिया है।
सिस्टम की जरूरत क्यों
वर्तमानया प्रचलित व्यवस्था में परीक्षकों के पास मूल्यांकन का कोई मॉडल नहीं है, प्रत्येक परीक्षक का दृष्टिकोण उत्तर को लेकर अलग-अलग होता है और एक ही प्रकार के उत्तर पर अलग-अलग परीक्षक अपने अपने दृष्टिकोण से अलग अलग मार्किंग कर देते हैं। इससे छात्रों को नुकसान होता है और न्याय संगत अंक नहीं मिल पाते। अब लागू की जाने वाली मार्किंग स्कीम में परीक्षकों पर अपने एकांगी नजरिए से अंक देने की परम्परा पर अंकुश लग जाएगा।
भरतपुर. बृज विश्वविद्यालय फाइल फोटो