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तेल उद्योग निवेश प्रोत्साहन योजना में शामिल, सृजित होगा रोजगार

4 वर्ष पहले
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राजस्थाननिवेश प्रोत्साहन योजना-2014 में सरकार ने अब तेल उद्योग को भी शामिल कर लिया है। इससे तेल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा तेल इकाइयां बढ़ेंगी। इससे किसानों का भी लाभ होगा। सरसों तेल उद्योग जिले का सबसे बड़ा कारोबार है। अब तक इस योजना के तहत विनिर्माण क्षेत्र की सिरेमिक ग्लास, डेयरी, इंडस्ट्रीयल गैस, फार्मास्युटिकल्स, प्लास्टिक आयल, पावर लूम, टैक्सटाइल, पर्यटन, कोटा स्टोन, रक्षा, आईटी रोबोटिक्स इकाइयां ही लाभान्वित हो रही थीं। इसके अलावा सेवा क्षेत्र में अस्पताल, डिस्पेंसरी, पॉलीक्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, आर एंड डी लेबोरेटरीज, विश्वविद्यालय, कालेज, व्यवसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास केंद्र, इंडस्ट्रीयल पार्क, मनोरंजन प्रदान करने वाले उद्यम सहित कई अन्य राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित उद्यमों को योजना का लाभ मिल रहा था।

लंबे समय से थी मांग व्यवसायियों की ओर से लंबे समय से तेल उद्योग को इस स्कीम में शामिल किए जाने की मांग की जा रही थी। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना राज्य में निवेश संवर्धन कर रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से यह योजना सर्वप्रथम 2010 में तैयार की। अक्टूबर 2014 में इस योजना को और नया रूप दिया गया और इसकी अवधि 31 मार्च 2019 तक तय की गई। योजना में नई इकाइयां जो स्टार्ट अप करना चाहती हैं, स्थापित इकाई जो विस्तार के लिए निवेश करना चाहती हैं तथा रुग्ण इकाई जो पुनरुद्धार के लिए निवेश करना चाहती हैं को योजना में पात्रता दी गई है।

योजना में निवेश करने वालों को ये मिलेंगे लाभ

योजनाके तहत उद्योग स्थापना से पूर्व उद्यमी को दो प्रकार के लाभ मिलेंगे। इसके तहत उद्यमी को जमीन खरीदने पर स्टांप ड्यूटी भूमि संपरिवर्तन कराने पर 50 प्रतिशत राशि की छूट मिलेगी। इसके अलावा इकाई के उत्पादन होने के 90 दिवस की अवधि में विद्युत शुल्क, मंडी शुल्क, प्रवेश शुल्क, विलासिता कर तथा मनोरंजन शुल्क पर 50 प्रतिशत की छूट मिलेगी, निवेश अनुदान के रूप में वैट का 30 से 50 प्रतिशत नियमानुसार मिलेगा। रोजगार सृजन अनुदान के रूप में वैट का 20 प्रतिशत लाभ सामान्य श्रेणी में 30 हजार रुपए सालाना एवं विशेष श्रेणी में 35 हजार रुपए सालाना मिलेगा। सभी प्रकार की लाभों की अवधि नियमानुसार 7 से 10 वर्ष तक रहेगी।

जिलेकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है सरसों का तेल

सरसोंतेल उद्योग जिले की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है। क्योंकि प्रति माह करीब 250 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। जिले में करीब 90 तेल मिलें हैं, जिनमें प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करीब 15 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यहां प्रतिवर्ष करीब 2 लाख हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सरसों की बुवाई होती है। साथ ही यहां उत्पादित तेल बिहार, बंगाल, उड़ीसा, आसाम, झारखंड आदि में सरसों के बजाए सरसों तेल के नाम से बिकता है। इसलिए भरतपुर को सरसों बैल्ट कहा जाता है।

भरतपुर। तेल के पीपे ले जाता ट्रैक्टर।

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