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प्रतिभा सम्मान में भेदभाव, विद्यार्थियों ने स्कूल पर ताला जड़ प्रधानाचार्य का पुतला फूंका

4 वर्ष पहले
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पारसोलीमें दस दिन पहले आयोजित कलेक्टर की शिक्षा चौपाल में प्रतिभावान बालिकाओं के सम्मान में बरते गए भेदभाव के विरोध में शनिवार को विद्यार्थी एवं ग्रामीण सड़क पर उतरे। स्कूल की फाटक पर ताला जड़ा एवं प्रधानाचार्य का पुतला फूंका नारेबाजी की। माहौल गर्माया तो पुलिस प्रशासन के अधिकारी पहुंचे। प्रधानाचार्य के विरुद्ध कार्रवाई के आश्वासन पर माहौल शांत हुआ।

कलेक्टर इन्द्रजीत सिंह की मौजूदगी में 26 सितंबर को शिक्षा रात्रि चौपाल राउमावि पारसोली में हुई। पारसोली बालिका रामावि से 10 वीं कक्षा में 91 फीसदी अंक प्राप्त खुशी सबनानी, 89 फीसदी अंक प्राप्त श्वेता शर्मा 87.89 फीसदी अंक प्राप्त करने वाली छात्रा आयत खानम के नाम की सूची सम्मानित के लिए भेजी थीं। लेकिन पहले स्थान वाली खुशी सबनानी, दूसरे स्थान पर श्वेता शर्मा की बजाय तीसरे स्थान पर रही आयत खानम को राउमावि प्रशासन ने कलेक्टर के हाथों सम्मानित करा दिया। यह बात गांव में चर्चा बनी। प्रतिभाओं के सम्मान में हुए भेदभाव के विरोध में विद्यार्थी परिजन शुक्रवार को प्रधानाचार्य सुरेशचन्द्र कच्छारा के पास उलाहना देने पहुंचे। संतोषपूर्वक जवाब नहीं मिलने पर अभिभावक एवं विद्यार्थी आक्रोशित हुए। शनिवार को फिर आक्रोशित विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के गुस्से का गुबार फूट पड़ा। राउमावि पारसोली स्कूल की फाटक पर ताला लगाया। प्रधानाचार्य कच्छारा पर भेदभाव का आरोप लगाते नारेबाजी कर पुतला फूंका एवं निलंबन की मांग करने लगे। सूचना पर पारसोली थानाधिकारी श्याम सिंह, तहसीलदार फूलाराम, नायब तहसीलदार बंशीलाल मौके पर पहुंचे और स्कूल प्रिंसीपल के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत कराया। प्रदर्शन के दौरान पारसोली सरंपच घीसूलाल भील, अनिल कुमार, दौलतराम सिंधी, दीपक सिंधी, कान सिंह, राकेश माली मौजूद थे।

भालुंडी मामले में भी कार्रवाई नहीं

दो दिन पहले भालूंडी स्कूल में संस्था प्रधान-पीटीआई, एक पंचायत सहायक एवं शिक्षिका के बीच जबदस्त विवाद हो गया था। स्कूल की छुट्टी तक कर दी गई थीं। संस्था प्रधान ने पीटीआई को डीईओ कार्यालय के लिए रिलीव किया, लेकिन वहां से वापस स्कूल भेज दिया। मामले को दो दिन बितने के बाद भी माध्यमिक शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया। महज जांच भदेसर प्रिंसीपल को सौंप दी।

प्रदर्शन करते विद्यार्थी ग्रामीण।

^सम्मानित के नाम मैंने नहीं एसडीएम ने चयन किए थे। छात्रा खुशी को सूचना देने का काम मेरा नहीं संबंधित स्कूल का था, शिक्षा चौपाल में वह उपलब्ध भी नहीं थीं। स्कूल में एसएमसी की बैठक हो रही है। कोई अव्यवस्था नहीं है। -सुरेशचंद्रकच्छारा, प्रधानाचार्य, राउमावि पारसोली

^हमेंप्रधानाचार्य ने खुशी को बुलवाने की सूचना नहीं दी। सूचना होती तो बुलवाते। -अशोक कुमार खटवानी, प्रधानाचार्य राबामावि पारसोली

^पारसोलीमें क्या विवाद हुआ। इसकी जानकारी मुझे नहीं है। रही बात भालूंडी स्कूल की तो, मामले की जांच भदेसर प्रिंसीपल को सौंपी है। जांच के बाद ही कार्रवाई करेंगे। -हेमंतकुमार द्विवेदी, डीईओ माध्यमिक, चित्तौड़गढ़

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