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हमारी काष्ठ कला को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

Dainik Bhaskar

Dec 11, 2015, 03:21 AM IST

Chittorgarh News - भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़ किसीजमाने पर दूर-दूर तक विख्यात रही बस्सी की काष्ठ कला आखिरकार राष्ट्रीय स्तर...

हमारी काष्ठ कला को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
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भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़

किसीजमाने पर दूर-दूर तक विख्यात रही बस्सी की काष्ठ कला आखिरकार राष्ट्रीय स्तर पर नवाजी गई है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने परंपरागत शिल्प को जीवित रखने में अहम योगदान के लिए प्रदेश के 22 हस्तशिल्पियों को सम्मानित किया। इसमें बस्सी के कावड़ शिल्पी सत्यनारायण शामिल है।

केंद्रीय वस्त्र मंत्री संतोष कुमार गंगवार सहित गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में बुधवार को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ने वर्ष 2012, 2013 एवं 2014 में तीन श्रेणियों में नामित किए गए कलाकारों को पुरस्कार दिए गए। इसमें सत्यनारायण सुथार को काष्ठ कावड़ कला कार्य पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता श्रेणी में वर्ष 2014 के लिए नवाजा गया। लगभग 43 वर्षीय सत्यनारायण काष्ठ कला चित्रकारी के पारंपरिक सुथार शिल्पी हैं। इनको अपने पिता देवीलाल से यह कला विरासत में मिली। वर्ष 2011 में कावड़ के लिए तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने राज्यस्तरीय पुरस्कार से नवाजा था। गत आठ वर्ष में आईआईटी मुंबई, नेश्नल इन्स्टीट्यूट आॅफ डिजाइन अहमदाबाद, दस्तकार दिल्ली, पारंपरिक मुंबई, इंदिरा गांधी नेश्नल सेंटर फार आर्ट्स नई दिल्ली शिल्प राष्ट्रीय संस्थाओं तथा ललित कला अकादमी जयपुर में जाने, कार्यशालाएं करने तथा प्रदर्शनियों में भाग लेने के दर्जनों अवसर मिले हैं।

बस्सी के इन शिल्पियों की पहचान

इससमय बस्सी के जमनालाल, द्वारका, अवन्तिलाल, शिवलाल, देवीलाल, रतनलाल, रामनिवास, बोतलाल कारीगरों सहित नवयुवकों में वेदप्रकाश, श्यामलाल, सूरज, नंदलाल, रामकिशन, गोपाल, पवन, मनोहर और रामप्रसाद के कामों का कोई जवाब नहीं। द्वारकालाल ने नायाब काम कर महानगरों में ख्याति दिलवाई। उसने दिल्ली में इन्दिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर चार हाथियों की आकृति के पायों पर रखी सुन्दर कारविंग काष्ठ की टेबल सन् 1986 में बनाई।

इस साल दूसरा पुरस्कार

हस्तकलाके क्षेत्र में चित्तौड़गढ़ जिले की झोली में इस वर्ष का यह दूसरा पुरस्कार है। इससे पूर्व आकोला निवासी नंदलाल छीपा के पुत्र सुरेश चन्द्र को पारंपरिक कपड़ों की रंगाई छपाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों हैदराबाद में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है।

कावड़ बनाने के पुश्तैनी काम पर ही फोकस

बस्सीमें यूं तो लकड़ी की कठपुतली, ईसर, तोरण, गणेश, बाजोट, माणकथंभ, कावड़, चैपड़े, खांडे, मुखौटे, छापे, मुखौटे, मूर्तियां, देवदासियां, गाडूले, पांवड़ियां, गंजफा, मोर-मोरनी, लोक-प्रतिमाएं, विमान, झूले, छड़ीदार, चैबदार, हाथी, घोड़े, ऊंट, कबूतर सजावटी सामान बरसों से प्रमुखता से बनाए जाते हैं, पर सत्यनारायण केवल कावड़े बनाने का पुश्तैनी काम ही करता है। इस काम में उसकी प|ी कौशल्या पूरा हाथ बटाती है।

बस्सी में अपनी छोटी सी दुकान पर इस तरह कावड तैयार करता सत्यनारायण। (फाइलफोटो)

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