पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • एसई एईएन पर लटकी अवमानना की तलवार

एसई एईएन पर लटकी अवमानना की तलवार

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
करीब2 साल की लंबी लड़ाई के बाद एक उपभोक्ता को बड़ी जीत मिली है। उपभोक्ता की लड़ाई पेयजल को लेकर थी। उपभोक्ता के घरेलू कनेक्शन की पेयजल सप्लाई जनवरी-13 में बंद हो गई थी। जलदाय विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। हार कर उपभोक्ता को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच में वाद दायर करना पड़ेगा। फैसला उपभोक्ता के पक्ष में आया। फैसले के अनुसार जलदाय विभाग को अविलंब रोजाना उचित दबाव पर पेयजल सप्लाई करने, आपूर्ति शुरू होने तक 10 दिन में मीठे पानी का एक टैंकर सप्लाई करने तथा जनवरी-13 के बाद जारी बिलों को निरस्त किया जाए। फैसला आए 14 दिन बीत गए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की है। ऐसी स्थिति में एसई एईएन पर अवमानना की तलवार लटकती दिखाई दे रही है।

मामला चौधरी कालोनी निवासी वैद्य विष्णु कांत तिवाड़ी से जुड़ा है। वैद्य तिवाड़ी के घरेलू कनेक्शन की जनवरी-13 में जलापूर्ति ठप हो गई। इसकी जेईएन से लेकर सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (एसई) तक शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गर्मियों में पेयजल की समस्या गहराई तो उपभोक्ता को 400 रुपए प्रति टैंकर के हिसाब से पानी मंगवाना पड़ा। समाचार पत्रों में खबर छपी तो जलदाय विभाग के अधिकारियों ने कहा चौधरी कालोनी में नियमित टैंकरों से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। इस पर उपभोक्ता ने 14 जून-14 को कलेक्टर से आरटीआई के तहत पूछा कि चौधरी कालोनी में रोजाना कितने टेंकर और घरों में पेयजल सप्लाई की जा रही है। जवाब नहीं आया तो करीब महीनेभर बाद 18 जुलाई को रिमाइंडर लेटर भेजा तो 2 अगस्त को कलेक्टर द्वारा जवाब आया कि दौसा में जलदाय विभाग के उच्चाधिकारी बैठते हैं। वहां अपील करें। एसई को महीनेभर में 3 बार अपील की। पहली बार 8 अगस्त, फिर 22 को और तीसरी बार 2 सितंबर को, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद 8 नवंबर को सूचना आयोग जयपुर को अपील की।

उपभोक्ता विष्णुकांत तिवाड़ी ने परेशान होकर 16 अक्टूबर-14 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच में वाद दायर किया। दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन जलदाय विभाग की ओर से कोई नहीं पहुंचा। दुबारा 22 अक्टूबर को सूचना भिजवाई तो विभाग की ओर से यूडीसी गुरुदयाल सिंह पहुंचा। उसे पाबंद किया कि 10 नवंबर को एईएन को सुनवाई के लिए भेजा जाए, लेकिन एईएन नहीं पहुंचा। इस पर 12 नंवबर को मंच ने फैसला आने तक सात दिन में मीठे पानी का एक टैंकर की सप्लाई करने का आदेश दिया। मामले में पैरवी करते हुए एडवोकेट महेश कुमार शर्मा ने कहा कि विभाग नियमित रूप से उपभोक्ता को बिल भेजा रहा है, जबकि पेयजल की आपूर्ति हो ही नहीं रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए मंच ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। मंच अध्यक्ष डॉ. बृजमोहन बंसल ने 29 जनवरी को सदस्य शोभना गुर्जर रमेश चंद रैगर की मौजूदगी में सुनाए फैसले के अनुसार जलदाय विभाग को अविलंब रोजाना उचित दबाव पर परिवादी को पेयजल आपूर्ति करने, नियमित आपूर्ति शुरू होने तक 10 दिन में मीठे पानी का एक टैंकर सप्लाई करने, जनवरी-13 के बाद जारी बिलों को निरस्त करने तथा इस अवधि में जारी बिलों की राशि जमा करा दी तो उस राशि को उपभोक्ता के आगामी बिलों में समायोजित करने के आदेश दिए। साथ ही साढ़े तीन हजार रुपए का जुर्माना भी किया। विदित रहे कि शहर में ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन के कनेक्शन के बावजूद घरों में पेयजल पहुंचता ही नहीं है। इसके बावजूद विभाग नियमित बिल भेजता है। ऐसे लोगों के लिए वैद्य विष्णुकांत तिवाड़ी का 2 साल का संघर्ष प्रेरणा बन सकता है। अन्य पीड़ित लोग भी जलदाय विभाग के खिलाफ प्रतितोष मंच की शरण ले सकते हैं।