- Hindi News
- बोर्ड परीक्षा एक माह बाद, सेंटर की सूची का पता नहीं
बोर्ड परीक्षा एक माह बाद, सेंटर की सूची का पता नहीं
संबलन में खुली गुणवत्ता की पोल
दौसा(ग्रामीण). शिक्षासंबलन अभियान के तहत बुधवार को अधिकारियों ने स्कूलों में बालकों के शैक्षिक स्तर की जांच की। राउमावि कालाखो में बीईईओ सुशील शर्मा, राउप्रावि रूडमल का बास का एबीईओ राजेंद्र शर्मा, कांदोली का निरंजन ने निरीक्षण किया। कालाखो में कक्षा 6 के अधिकतर बालक अंग्रेजी के अक्षर तक नहीं पहचान सके। कक्षा 7 के बालक अंग्रेजी हिंदी की किताबें नहीं पढ़ सके।
कार्यालय संवाददाता | दौसा
बोर्डपरीक्षाएं शुरू होने में सिर्फ एक माह का समय बचा है, लेकिन अभी तैयारी कुछ नहीं है। बोर्ड से अभी सेंटरों की सूची, परीक्षार्थियों की संख्या तक नहीं आई है। इसके अलावा वीडियोग्राफी, फर्नीचर, टेंट अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में भी कोई आदेश नहीं आए हैं। सेंटरों की सूची जल्द नहीं आई तो परीक्षार्थियों को सिटिंग व्यवस्था के लिए परेशान होना पड़ सकता है, क्योंकि आनन फानन में स्टूल मेज की व्यवस्था करना संभव नहीं होगा।
नकलपर नकेल के लिए अधिकारी गंभीर नहीं : दौसाजिला बोर्ड परीक्षाओं में नकल के मामलों में कुख्यात और विख्यात दोनों रहा है। वर्ष 2010-11 की परीक्षाओं से पूर्व तत्कालीन डीईओ मा. कमलेश शर्मा ने कई सेंटरों का दौरा किया, जो नकल के मामलों में ज्यादा कुख्यात थे। वहां के लोगों से बातचीत की। डीईओ शर्मा ने लोगों को समझाया कि नकल करने और कराने से किसी का भला होने वाला नहीं है। कंपीटिशन के दौर में सफलता के लिए कड़ी मेहनत जरुरी है। लोगों को डीईओ शर्मा की बात समझ में आई और सामूहिक नकल जैसा एक मामला सामने नहीं आया। बल्कि ग्रामीणों ने सेंटरों के बाहर फहरा दिया और नकल कराने वालों को रोका-टोका। इसके बाद आए डीईओ जगदीश प्रसाद मीणा ने भी वर्ष 2011-12 2012-13 की परीक्षाओं के समय लोगों को आगाह किया कि नकल कराना खुद के बेटा-बेटियां का भविष्य खराब करना जैसा है। डीईओ मीणा की पहल भी काम आई। पिछले साल 2013-14 की परीक्षाओं के दौरान डीईओ मा. ओमप्रकाश शर्मा थे। वे किसी सेंटर पर नहीं गए, लेकिन पूर्व डीईओ कमलेश शर्मा जगदीश प्रसाद मीणा की मेहनत का फल उन्हें मिल गया। अब डीईओ जीवन शंकर शर्मा हैं। वे भी अभी तक नकल के लिए बदनाम सेंटरों पर नहीं गए हैं। ही वहां के लोगों से संपर्क किया है। ऐसे में नकल पर नकेल कैसे कसेगी।