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जर्जर आवास भवनों में रहने को मजबूर चििकत्सक

6 वर्ष पहले
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यहांचिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनदेखी के चलते सामुदायिक अस्पताल के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को मजबूरन कंडम आवास भवनों में रहना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार सामुदायिक अस्पताल में 6 चिकित्सक कार्यरत है। जिनकों रहने के लिए अस्पताल परिसर में आवास भवनों का अभाव है। अस्पताल में चिकित्सकों के आवास भवनों में मात्र एक भवन ही सही है जबकि अस्पताल के पांच चिकित्सकों को कंडम आवास भवनों में रहना पड़ रहा है। इसी प्रकार चिकित्साकमियों के आवास भवनो की स्थिति भी खराब है। चिकित्साकर्मियों के तीन आवास भवन ही सही हालात में है। जिसके चलते चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि चिकित्सा विभाग द्वारा अस्पताल में 13 नए आवास भवन बनाए जाने की स्वीकृति दी जा चुकी है लेकिन पुराने आवास भवनों को तोड़ जाने के बाद ही नए आवास भवन बनाए जा सकते है। चिकित्सा प्रभारी डां. प्रहलाद मीना ने बताया कि सीएमएचओ से कंडम आवास भवनों को गिराने की स्वीकृति लिए जाने के लिए लिखा जा चुका है। सरकार द्वारा आवास भवनों को गिराने की स्वीकृति मिलने के बाद ही नए भवन बनाए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में कंडम आवास भवनों में कर्मचारियों को अस्पताल की व्यवस्थाओं के लिए रहना पड़ता है। ताकि आपात परिस्थिति में चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मी तुरंत सके।

अस्पतालमें नहीं एंबुलेंस

पापड़दा|कस्बे केसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार माह से 104 एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।मीठालाल मीणा ने बताया कि अक्टूबर में बीघावास ठीकरिया के समीप इस अस्पताल की एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इसके बाद से ही मरीजों को दौसा के लिए रैफर करते हैं, तो निजी वाहनों को मुंह मांगे दाम देकर ले जाना पड़ता है। छगन लाल मीणा ने बताया कि सरकार की सेवा के बंद होने से लोगों को परेशानी हो रही है। अस्पताल प्रभारी डॉ. सुनील यादव ने बताया कि पहले एंबुलेंस रिपेरिंग के लिए बजट नहीं था।

मंडावर. जर्जरपड़े चिकित्सक आवास। इनमें सिर्फ एक मकान रहने लायक है।