80 फीसदी विकलांग 200 किमी दूर से पहुंचा पटवारी परीक्षा देने
सिस्टमही ऐसा हो गया कि किसी को दूसरे की समस्या दिखाई ही नहीं देती है। मैं शारीरिक रूप से 80 फीसदी विकलांग हूं। करीब 200 किमी दूर से पटवारी भर्ती परीक्षा देने दौसा आया हूं। सफर में काफी परेशानी हुई। बेहतर होता कि मेरे जैसे विकलांग अभ्यर्थी का सेंटर गृह जिले में ही दिया जाता। यह कहना है कि अलवर में कठूमर निवासी अमर सिंह जाटव का, जो शुक्रवार सुबह पटवारी परीक्षा देने के सिलसिले में दौसा पहुंचा। अमरसिंह जाटव (26) बीए तक पढ़ा लिखा है। साथ में कंप्यूटर कोर्स भी कर रखा है। अमरसिंह जाटव ट्रेन से शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे दौसा पहुंचा।
वह पटवारी भर्ती परीक्षा देने आया है, जिसका सेंटर फलसे वाले बालाजी रोड स्थित राजा पब्लिक स्कूल में आया है। अमरसिंह जाटव दोनों पैरों से विकलांग हैं। उसके लिए हाथ ही पैर हैं, जिनके सहारे वह चलता फिरता है। उसके पास बोर्ड का मेडिकल सर्टिफिकेट भी है, जिसमें उसे 80 फीसदी विकलांग दर्शाया हुआ है। अमरसिंह जाटव शारीरिक रूप से भले ही विकलांग है, लेकिन मानसिक रूप से काफी मजबूत है। वह नौकरी के सिलसिले में कई बार सीएम हाउस भी गया, लेकिन मुख्यमंत्री से अधिकारियों ने कभी मिलने नहीं दिया। अलवर कलेक्टर से भी छोटा-मोटा काम-धंधा दिलाने के बारे में मिला, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। अमरसिंह जाटव का कहना है कि मुझे कोई ऐसा काम-धंधा मिल जाए, जिसे मैं बैठा-बैठा कर लूं। इससे मेरी दो टाइम की रोटी-पानी का जुगाड़ हो जाए। पैरों से लाचार के कारण वह उठ नहीं सकता और ही चल सकता है। सिर्फ हाथों के सहारे ही चलता है।