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आरक्षण आंदोलन के केस री-ओपन कराना साजिश

7 वर्ष पहले
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21 को थौलाई में पंचायत, 28 को अजीतखेड़ा में महापंचायत

राजस्थानगुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता हिम्मत सिंह पाड़ली ने कहा कि सरकार मुकदमों की तलवार लटकाकर गुर्जरों की आवाज को दबा नहीं सकती।

गुरुवार को एक बयान जारी कर प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सरकार जब तक पांच प्रतिशत आरक्षण विशेष पिछड़ा वर्ग को मूलभूत अधिकार नहीं देती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण आंदोलन के केसों को वापस लेने का सरकार से समझौता हुआ था। वर्ष 2006 से 2011 के दौरान आंदोलन में राज्य में 605 मुकदमे दर्ज हुए थे। दौसा जिले में 158 प्रकरण दर्ज हुए थे। इनमें 46 मुकदमों में चालान पेश किए गए तथा 92 मुकदमों में एफआर लगाई, लेकिन 8 प्रकरणों को री-ओपन किया गया है। 20 प्रकरण अभी भी लंबित हैं। सरकार ने 23 प्रकरणों को वापस लेने की सिफारिश की है तथा न्यायालय द्वारा 74 प्रकरणों में एफआर स्वीकार की गई है। उन्होंने कहा कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन के केस को री-ओपन कराना सरकार की साजिश है। सरकार गुर्जरों को कार्रवाई का भय दिखाकर आरक्षण की मांग को दबा नहीं सकती। सरकार ने समय रहते हक नहीं दिया, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।

उन्होंने बताया कि गुर्जर आरक्षण आंदोलन के समर्थन में 21 सितंबर को थौलाई (जमवारामगढ़) में पंचायत होगी तथा गुर्जर आंदोलन की निर्णायक महा पंचायत 28 सितंबर को अजीत खेड़ा कटारा अजीज में होगी।