श्रीगंगानगर. शारदीय नवरात्र गुरुवार से शुरू हो रहे हैं। इसके लिए भक्तों ने एक दिन पहले ही अपनी सारी तैयारियां पूरी कर ली। शहर के बाजारों में बुधवार को खूब रौनक देखी गई। घट स्थापना के लिए श्रद्धालुओं ने मिट्टी के बर्तन, माता की पसंदीदा लाल चुनरी, नारियल, शृंगार का सामान, फल और मिठाइयों की खरीदारी करी।
नवरात्रों के प्रारंभ होने के साथ ही शुभ दिन फिर से शुरू हो रहे हैं, ऐसे में बाजारों में लोगों ने जमकर खरीदारी की। वहीं शहर कई जगह माता के दरबार भी बुधवार को ही तैयार कर दिए गए। विनोबा बस्ती स्थित दुर्गा मंदिर हो या फिर हनुमानगढ़ रोड स्थित करणी माता का मंदिर सभी में गुरुवार से होने वाले विशेष पूजन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
जब किसी भ काम की शुरूआत होती है तो मन में भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास का होना बहुत जरूरी है। माता के नौ रूप में से पहला रूप मां शैल पुत्री का होता है और यह रूप दृढ़ आस्था और आत्मविश्वास का रूप है। शैल पुत्री का अर्थ है हिमालय की बेटी। आस्था और आत्मविश्वास अगर हिमालय की तरह अचल और अडिग है तो सफलता जरूर मिलेगी।
पुराणों और शास्त्रों में देवी मां की महिमा औैर नवरात्रि के संदर्भ में कई प्रसंग हैं, लेकिन नवरात्रि शक्ति, सामर्थ्य और सफलता का उत्सव है। मान्यता है कि भगवान राम ने नवरात्र के नौ दिन तक शक्ति प्राप्त करके दसवें दिन रावण का वध किया था और इस संसार को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई थी। ये नौ दिन शक्ति की आराधना के होते हैं और सारी शक्ति हमारे आत्मविश्वास पर टिकी होती है। बाकी के आठ दिनों में माता के अलग-अलग रूपों की उपासना कर लोग अपने घर में सुख और समृद्धि ला सकते हैं।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार देवी मां का यह नाम हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण पड़ा, इसलिए माता का यह रूप मनुष्य को स्थिरता प्रदान करता है। साथ ही अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन योगीजन अपनी शक्तियों और ज्ञान को बढाने के लिए योग साधना करते हैं।