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भगवान ने इंसान को मां के रूप में दिया सबसे कीमती तोहफा
ऊपरजिसकाअंत नहीं उसे आसमां कहते हैं, धरती पर जिसका अंत नहीं उसे मां कहते हैं। यह बात प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में आयोजित \\\"वाह जिंदगी वाह\\\'\\\' कार्यक्रम के अंतिम दिन राजयोगी और ब्रह्मकुमार प्रोफेसर ईवी स्वामीनाथन ने कही। उन्होंने बताया कि किसी भी मनुष्य को कभी भी मां का दिल नहीं दुखना चाहिए और ही कभी कोई ऐसा काम करना चाहिए, जिससे मां को दुख पहुंचे। क्योंकि माता के रूप में भगवान ने इंसान को सबसे बड़ा तोहफा दिया है। मां पहले तो नौ महीनों तक बच्चे को अपनी कोख में रखती है, फिर उसको जन्म देती है। इसके बाद बच्चों को पालती पोसती है और उन्हें बड़ा करती है, मगर इसके बदले में कभी वह कुछ नहीं मांगती है।
अगर हम अपना सब कुछ भी बेचते हैं तो भी हम कभी मां का कर्ज नहीं उतार सकते। इसके पहले कार्यक्रम में मौजूद बच्चों को पांच मिनट का मैडीटेशन कराया गया। प्रोफेसर स्वामीनाथन का कहना था कि कार्यक्रम में हर दिन बड़ी संख्या में मौजूद बच्चों ने पूरे मन से शिविर में ध्यान लगाया। उन्होंने बताया कि अगर बचपन से ही बच्चों में ध्यान की आदत हो जाए तो भविष्य में वह कई तरह की बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे।
नि:शुल्कमेडिटेशन शिविर आज से
विश्वविद्यालयपरिसर में 15 से 21 सितंबर तक नि:शुल्क ध्यान शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान सुबह 7 से 8 और शाम 7 से 8 बजे तक शिविर का आयोजन होगा। साथ ही महिलाओं के लिए 5 से 6 बजे तक शिविर लगेगा।