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जहां विचारों में विनम्रता होती है वहीं भगवान निवास करते हैं
नगर संवाददाता| श्रीगंगानगर.
जहांलोगों के विचार विनम्र और विशुद्ध होते हैं, उन स्थानों पर देवताओं का वास होता है। जब विचार पवित्र होते हैं तो लोग अपना समय सिर्फ धार्मिक कार्यों और सत्कर्मों में ही लगाते हैं, जिससे उस स्थान की पवित्रता और महत्ता बढ़ जाती है। इस कारण वह स्थान भगवान को भी प्रिय हो जाता है। यह बात एल ब्लाक स्थित हनुमान मंदिर में चल रही भागवत कथा के पांचवें दिन स्वामी ब्रह्मदेव ने कही।
उन्होंने बताया कि हर मनुष्य के लिए विचारों की शुद्धता सबसे ज्यादा जरूरी होती है। जिस मनुष्य के विचार सही नहीं होते हैं वह अपना अधिकतर समय गलत कार्यों में ही लगाता है। इसके अलावा उसकी संगति भी गलत हो जाती है और वह अहंकारी हो जाता है। इस कारण वह हर उस कार्य में लिप्त हो जाता है, जाे उसे नहीं करना चाहिए। शराब पीने और मांस खाने के कारण उसके घर का वातावरण दूषित हो जाता है और भगवान उससे दूर हो जाते हैं। कथा वाचक मुदगल शास्त्री ने प्रवचन दिए। गुरुवार को श्रीकृष्ण के बाल्यकाल की सुंदर और मनमोहक झांकी सजाई गई थी।
श्रीगगानगर. कथा के दाैरान सजी भगवान कृष्ण की सचेतन झांकी।