वेश बदलकर रावण ने किया सीता का हरण
साधुके वेश में आए रावण ने जब माता सीता का हरण किया तो बचाने के लिए उनके मुंह से निकले प्रभु शब्द ने करीब हजारों की संख्या में बैठे लोगों को एक बारगी तो शांत कर दिया। इसके बाद जब प्रभु राम कुटिया पहुंचे तो दर्शकों ने जयश्रीराम के उद्घोष लगाने शुरू कर दिए और पूरा माहौल राममय से गूंज उठा। सुखाड़िया सर्किल में श्रीसनातन धर्म महावीर दल रामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित रामलीला में रविवार को सीता हरण का मंचन किया गया।
मंचन में दिखाया गया कि रावण की बहन शूर्पणखा भगवान श्रीराम को देख मोहित हो जाती है। वह श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है और जब भगवान मना करते हैं तो वह माता सीता पर आक्रमण कर देती है। इससे नाराज होकर लक्ष्मण उनकी नाक काट देते हैं। बहन शूर्पणखा के नाक-कान कटने के बाद उसके भाई खर और दूषण बदला लेने के लिए भगवान से युद्ध करते हैं। इसमें वे मारे जाते हैं। रावण को जब इसकी जानकारी होती है तो वह मारीच राक्षस को सोने का हिरण बनकर राम के पास भेजता है। माता सीता की जिद के कारण रामजी उस हिरण के पीछे वन जाते हैं और हिरण का वध कर देते हैं। इस दौरान हिरण राम की आवाज में लक्ष्मण को पुकारता है। इधर, माता सीता को लगता है कि शायद भगवान राम पर कोई खतरा आया है। माता सीता लक्ष्मण को वन भेजती हैं, लेकिन बड़े भाई के मना करने के चलते लक्ष्मण वन जाने से मना करते हैं।
श्रीगगानगर. रामलीला मे सजा हुआ रावण का दरबार