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ऐसे भी दानदाता, लाखों रुपए करते हैं गुप्तदान

6 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. नेकी कर दरिया में डाल। इस कहावत को लोगों ने खूब सुना होगा, लेकिन इसे चरितार्थ होते हुए श्री सिद्ध पीठ झांकी वाले महाराज बालाजी के दरबार में देखा जा सकता है। इस दरबार में कई ऐसे दानदाता आते हैं। जो लाखों का दान हर साल देते हैं, लेकिन इनके बारे में कोई नहीं जानता।
ऐसे दानदाताओं से ही बालाजी दरबार में भंडारा चलता रहता है। मंदिर में गुप्त दान देने की बात मंदिर के सदस्य प्रेमजी ने बताई। उन्होंने बताया कि दानदाता मंदिर में आता भी है या नहीं कुछ नहीं मालूम।

हरसाल ऐसे दानदाता भेजते हैं राशन

श्रद्धा की कोई सीमा नहीं होती है। जितनी करो उतनी कम हैं। एक श्रद्धा भाव से की हुई भक्ति जिसमें तो नाम मालूम और ही पता। इस साल भी मंदिर के वार्षिकोत्सव में ऐसे भक्त खूब दिखे। मंदिर के बाहर दान आते ही पंडित के पास फोन जाता है। फोन पर आवाज आती है कि पंडित जी मंदिर के बाहर एक ऑटो पर राशन आया है, जाकर ले लीजिए।
पंडित पूछते हैं आप कौन तब तक फोन कट जाता है। दरअसल, दान करने वाला भक्त अपनी सूचना को गुप्त रखना चाहता है, इसलिए अपना परिचय देने के बजाय फोन काटना उचित समझता है। संस्था के सदस्य प्रेम जी बताते हैं कि हर साल ऐसे भक्तों के फोन आते हैं। जो दान तो देते हैं, लेकिन अपनी पहचान बताने से मना कर देते हैं।