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कश्मीर में कुदरत के कहर का असर हमारे बाजार पर भी

7 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. कश्मीर में पिछले दिनों बाढ़ के कारण आई प्रलय का असर शहर के बाजारों में भी पड़ सकता है। आने वाले त्योहारों में शहरवासियों को ड्राई फ्रूट्स और मौसमी फल खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। बाढ़ के कारण कश्मीर में सेब की काफी फसल तबाह हो चुकी है। वहां से ट्रांसपोर्ट भी ठप हो गया है।

इससे यहां कश्मीरी सेब, अखरोट, केसर, कश्मीरी नागा कश्मीरी बादाम की किल्लत होनी शुरू हो गई है। इसका असर आने वाले त्योहारों पर देखने को मिलेगा। नवरात्र, दशहरा, ईद और दीपावली में फलों और मेवों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में त्योहारों में इस बार शहरवासियों को कश्मीरी फलों मेवों की खरीदारी पर ज्यादा रुपए खर्चने पड़ सकते हैं।

अखरोट पर सबसे ज्यादा असर

सितंबर माह में हर साल अखरोट की आवक होती है। मगर कश्मीर से आने वाला ट्रांसपोर्ट ठप होने के कारण इस साल अखरोट की आवक एक से दो महीना देरी से होगी। साथ ही पिछले साल की तुलना में इस बार माल भी कम आएगा।
ड्राई फ्रूट्स विक्रेता पवन अग्रवाल ने बताया कि हर महीने शहर में लगभग 200 से 300 कार्टन की खपत होती है। जबकि त्योहारों के समय इसकी संख्या बढ़कर 500 कार्टन तक पहुंच जाती है। एक कार्टन में 10 किलो अखरोट होते हैं। अन्य विक्रेता बृजराम ने बताया कि दस दिन पूर्व एक किलो अखरोट का दाम 800 से 1200 रुपए तक था, जो अब 900 से 1200 रुपए तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि अगर इसकी नई खेप जल्दी नहीं आई तो दामों में उछाल सकता है।

श्रीगंगानगर. कश्मीर में आई बाढ़ के बाद शहर में कश्मीरी सेब आना बंद हो गए। अब हिमाचल प्रदेश से सेब रहे है। बीरबल चौक पर फ्रूट की दुकान पर सजे हिमाचल प्रदेश के सेब।