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घर के ऊपर से जा रही हाई टेंशन लाइन ने ली जान

7 वर्ष पहले
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घटनाकी जानकारी मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेना चाहा, लेकिन मुआवजे की मांग को लेकर गांव वाले अड़ गए और शव को नहीं ले जाने दिया। गांव की महिलाएं भी लाठी और डंडे लेकर बाहर निकल आई। उनका आरोप था कि विद्युत निगम की लापरवाही के कारण महेंद्र की मौत हुई है और परिवार के लिए जब तक अधिकारी मुआवजे की घोषणा नहीं की जाएगी उन्हें नहीं जाने नहीं देंगे।

मकानों से मात्र डेढ़ फीट ही ऊंचे हैं तार

गांवके सरपंच लाजेंदर ने बताया कि सरकार आपके द्वार अभियान के तहत जब मुख्यमंत्री शहर में आई थी तो जन सुनवाई के समय इन हाई टेंशन लाइनों को हटाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। क्योंकि तार की यहां बने मकानों से ऊंचाई मात्र एक से डेढ़ फीट ही है। इस कारण आए दिन हादसों की आशंका बनी रहती थी। मगर तीन माह बीतने के बाद भी विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई।

हादसेके बाद हटवाई लाइनें

हादसेके बाद मौके पर पहुंचे पुरानी आबादी के एईएन अनिल सिंघल ने ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण वहां से गुजर रही हाई टेंशन लाइन को हटाने की मांग करने लगे तब इसे हटवा दिया।

^इन लाइनों को हटाने के लिए कार्रवाई शुरू हो चुकी थी, लेकिन शिफ्टिंग के ऐसे मामलों में आधा खर्चा निगम वहन करता है और आधा खर्चा आवेदन करने वाले को वहन करना होता है। इसके लिए हमारी ओर से तैयारियां भी पूरी हो चुकी थी। दुर्घटना की जांच डिस्कॉम के इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर को सौंपी गई है। जांच के बाद विभागीय नियमों के आधार पर मृतक के परिवार जनों को मुआवजा दिया जाएगा।

अनिलसिंघल, सहायकअभियंता, जोधपुर डिस्कॉम, पुरानी आबादी।

नगर संवाददाता|श्रीगंगानगर

सरकारआपकेद्वार अभियान के तहत शहर आई मुख्यमंत्री को घरों के ऊपर से गुजर रही 11 केवी की हाईटेंशन लाइन हटाने के लिए ग्रामीणों की ओर से दिया गया आवेदन विद्युत निगम की फाइलों में ही धरा रह गया और सोमवार को एक अधेड़ इन लाइनों से करंट की चपेट में आकर मौत का शिकार हो गया। मामला मोहनपुरा रोड स्थित एक बी गांव का है जहां घर की छत से गुजरती 11 केवी विद्युत लाइन से टकराकर घर के मुखिया महेंद्र पाल (40) की मौत हो गई। वह छत पर पड़ी तिरपाल को हटाने गया था तब यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि मौत रूपी इन लाइन से ऐसी दुर्घटना की आशंका के चलते उन्होंने सरपंच के नेतृत्व में शहर