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रोडवेज के निलंबित मैनेजर ने ऑफिस आकर निपटाई फाइलें

7 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. रोडवेज के दोषी चालक की सजा कम करवाने की एवज में रिश्वत लेने के प्रकरण में दो बाबुओं के साथ लिप्तता पाए जाने पर श्रीगंगानगर डिपो के निलंबित मुख्य प्रबंधक सुखराम कड़वासरा ने शुक्रवार को डिपो आकर कई फाइलें निपटाई। पुराने बिलों पर भी हस्ताक्षर किए।
कड़वासरा के कार्यालय में आने की खबर की डिपो बस स्टैंड पर दिनभर चर्चा रही। वजह हैड ऑफिस उन्हें 23 सितंबर को निलंबित कर चुका है। उसके बाद से मुख्य प्रबंधक का चार्ज ट्रैफिक इंचार्ज सार्दुलसिंह के पास है। भास्कर टीम जब मौके पर पहुंची तो कड़वासरा और साथ बैठे कई कर्मचारी सकपका गए।

टीम को देख उन्होंने फाइलें हटवा दी और उठकर दूसरे कमरे में चले गए। उधर रोडवेज सूत्रों का कहना है कि निलंबित होने के बाद कड़वासरा का मुख्यालय जयपुर है। वे 30 सितंबर तक अवकाश पर हैं। ऐसे में यहां रोडवेज डिपो आकर फाइल निपटाने का क्या औचित्य। गौरतलब है कि 12 सितंबर को शिव चौक स्थित रोडवेज डिपो में एसीबी ने दो बाबुओं को 22 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था।
कार्रवाई के वक्त मुख्य प्रबंधक सुखराम कड़वासरा पास के कमरे में मौजूद थे। पड़ताल में कड़वासरा की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर एसीबी की रिपोर्ट के आधार पर रोडवेज के उच्चाधिकारियों ने उन्हें निलंबित कर दिया था।

मामले की जांच की जाएगी

निलंबित मुख्य प्रबंधक 30 सितंबर तक अवकाश पर हैं। अगर उन्होंने डिपो आकर बिलों फाइलों पर हस्ताक्षर किए हैं तो यह गलत है। अभी तक मोबाइल फोन की सिम भी निगम में जमा नहीं करवाई है यह जानकारी मुझे मिली है। मामले की जांच कर रिपोर्ट कार्रवाई के लिए हैड ऑफिस जयपुर भिजवाई जाएगी। -भगवानसिंह शेखावत, कार्यवाहक जोनल मैनेजर, बीकानेर।

भास्कर ने किए कड़वासरा से सवाल-जवाब

भास्कर: रोडवेज मुख्यालय ने आपको निलंबित कर दिया है ऑफिस कैसे आए।

कड़वासरा: पुराने बिलों पर हस्ताक्षर करने थे। टीआई को चार्ज देना था।

भास्कर: निलंबन के बाद हस्ताक्षर करने का कोई हक नहीं बनता तो फिर कैसे कर रहे हो।

कड़वासरा: यह बिल निलंबन से पहले के है। टीआई को बिल पास करने की पावर नहीं है।

भास्कर:बिलपास कैसे करने है यह सोचना निगम सरकार का काम है।

कड़वासरा: निलंबन से पहले की जिम्मेदारी मेरी ही बनती है।