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मांग की तुलना में 14 हजार मीट्रिक टन कम मिली खाद
एग्रीकल्चर रिपोर्टर| श्रीगंगानगर
जिलेमें अब भी यूरिया का संकट बरकरार है। यह अलग बात है अब हताश किसानों ने किफायत बरतकर रबी फसलों में खाद कम डालने का फैसला कर लिया। यही नहीं अब अधिकांश फसलों को यूरिया की जरूरत नहीं रही, क्योंकि फसल पकाव पर है। यही कारण है कि अब सोसाइटी, क्रय विक्रय सहकारी समितियों एवं प्राइवेट दुकानों पर किसानों की खाद लेने के लिए लंबी कतारें नहीं लग रही। जिले में इस सीजन में अब तक की मांग को देखते हुए 14 हजार मीट्रिक टन कम यूरिया खाद की आपूर्ति हुई है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि यूं तो पूरे रबी सीजन के दौरान खेतों की फसलों को देखते हुए विभाग ने एक लाख 1100 मीट्रिक टन खाद की मांग की थी। इसकी तुलना में किसानों को अब तक 77 हजार 991 मीट्रिक टन खाद मिली है। खाद का सर्वाधिक फटका नवंबर में लगा। मांगी 23500 मिली 7990 मीट्रिक टन। इससे पहले अक्टूबर में भी मांग के विपरीत ढाई हजार मीट्रिक टन यूरिया कम मिली। विभाग ने अक्टूबर 12500 मीट्रिक टन खाद की जरूरत बताई लेकिन आपूर्ति 10 हजार 88 मीट्रिक टन हुई। हालांकि दिसंबर में 21 हजार के बजाय 27 हजार 453 मीट्रिक टन, जनवरी में 20 हजार की तुलना में 23 हजार 880 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति हुई। इसी प्रकार फरवरी में 14800 एवं मार्च में 9300 मीट्रिक टन खाद की मांग की गई है। चालू माह में जिले में खाद के चार रैकों के जरिए 8630 मीट्रिक टन खाद आई है।