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ओडिसी नृत्य से मन मोहा

6 वर्ष पहले
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कल्चरल रिपोर्टर, श्रीगंगानगर।

आजका भारतीय समाज कल्चरल हैरिटेज की कद्र करना नहीं जानता, बच्चों में रुझान बढ़ाने के लिए स्पिक (सोसाइटी ऑफ प्रमोटेशन इंडियन आर्ट एंड कल्चर अमांग यूथ) मैके देश भर में सराहनीय कार्य कर रहा है।

यह बात यहां ब्लूमिंग डेल्स इंटरनेशनल स्कूल प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ओडिसी नृत्यांगना पद्मश्री रंजना गौहर ने कही। वे यहां ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करने आई थी।

उन्होंने अपनी प्रस्तुतियों में हालांकि मात्र तीन नृत्य रचनाएं पेश कीं लेकिन रचनाओं में बेजोड़ नृत्य के साथ साथ जिज्ञासुओं एवं विद्यार्थियों को सिखाया ज्यादा। कार्यक्रम के दौरान ओडिसी के उदय एवं विकास के संक्षिप्त इतिहास पर नजर डालते हुए उन्होंने नृत्य की शुरुआत स्वाति तिरुवल रचित भगवान विश्वनाथ की अाराधना राग आसावरी ताल खेमटा छह मात्रा निबद्ध-विश्वेश्वरन दर्शन को चलो तुम काशी से की।

नृत्य के साथ अपनी भाव भंगिमाओं में प्रफुल्लित मुद्रा में दर्शन को रवाना होने, चंदन घिसने, विश्वनाथ को तिलक करने, जल चढ़ाने, भस्म लगाने जैसी मुद्राओं के समावेश के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया। इसके बाद उनके शिष्य विनोद केल्विन बच्चन ने त्रिभंगी मुद्राओं में राग भोपाली में ताल कहरवा में निबद्ध ओडिसी नृत्य की विशुद्ध प्रस्तुति दी।

रंजना गोहर के शिष्य विनोद केल्विन बच्चन छात्राओं को ओडिसी के कुछ स्टेप सिखाते हुए।