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महिला जनप्रतिनिधियों के चेहरे पर घूंघट नहीं आत्मविश्वास की झलक दिखी

6 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. पंचायतीराज चुनाव के बाद जिला परिषद में एक दशक में हुए सामाजिक परिवर्तन की तस्वीर नजर आई। खासकर जिला परिषद सदस्य बनने के लिए दसवीं तक की शिक्षा की अनिवार्यता के सुखद परिणाम। जिला परिषद सभागार में दृश्य था सोमवार को पंचायती राज के जनप्रतिनिधियों की आमुखीकरण कार्यशाला का। नवनिर्वाचित सदस्यों की युवा महिला टीम के चेहरे पर घूंघट नहीं बल्कि आत्मविश्वास दिखा। यही लोकतांत्रिक अच्छी निर्णय शक्ति, ग्रामीण विकास और राजनीति में सुदृढ़ भागीदारी का संकेत था।

मिलजुलकर करेंगे सामाजिक बदलाव-जिलाप्रमुख: 31सदस्यों वाली जिला परिषद में 16 महिलाएं हैं। इनमें 22 वर्षीय जिला प्रमुख प्रियंका श्योराण बीएससी हैं। अधिकांश सदस्य युवा और उच्च शिक्षित हैं। जिला प्रमुख ने कार्यशाला अपनी सोच स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने कहा मिलजुलकर ही सामाजिक, आर्थिक बदलाव संभव है। श्योराण ने कहा कि वे अपने काम के जरिए नजीर पेश करना चाहती हैं। कार्यालय में बैठने के लिए समय तय करेंगी।

नियमोंकी जानकारी से विकास करवाना होगा आसान: कलेक्टरआरएस जाखड़ ने कहा कि जनप्रतिनिधि पंचायती राज अधिनियमों की अच्छी तरह से जानकारी प्राप्त करें। इससे काम करने में आसानी रहेगी। ग्राम प्रतिनिधियों को अधिकारों की पूरी जानकारी होनी चाहिए, लेकिन दायित्वों में अधिकार निहित हैं। उन्हें ईमानदारीपक्ष रहकर स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर जोर देंगे तो महात्मा गांधी के स्वशासन की अवधारणा अपने आप आगे बढ़ेगी। ग्रामीण जनप्रतिनिधि अगर अपने दायित्वों का भलीभांति निर्वहन करने लगेंगे तो अधिकार स्वत: मिलते चले जाएंगे।

विकासके साथ शिक्षा में भागीदारी का वादा: कार्यशालामें प्रशासन की ओर से कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षकों की समस्या का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कभी-कभार स्कूलों में भी जाएं। इस पर जिला प्रमुख प्रियंका श्योराण, 9 जेड की सरपंच अनुपमा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने सदस्यों ने विश्वास दिलाया कि अपने-अपने क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। साथ ही सफाई रखने, सोखते गड्ढे तैयार करने आदि पर चर्चा हुई।