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कार्रवाई का डर, मेडिकल शॉप से रातोंरात गायब किया यूरिया

7 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर । आखिर वही हुआ, जिसका ‘भास्कर’ ने अंदेशा जताया था। जिला अस्पताल परिसर में एक मेडिकल शॉप में गुरुवार रात चोरी छिपे जो 100 बैग यूरिया रखवाया गया था। वह शुक्रवार सुबह कृषि अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही एकाएक गायब हो गया। कृषि अधिकारियों को वहां यूरिया तो नहीं मिला। अलबत्ता उन्होंने दुकान के बाहर बिखरे यूरिया को ही इकट्ठा करके यूरिया का सैंपल ले लिया। विभाग ने यूरिया कारोबारी ज्ञान अरोड़ा को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब भी मांगा है। इस पूरी कार्रवाई में बरती गई ढिलाई से कृषि विभाग के अफसरों पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
शुक्रवार सुबह पहुंची कृषि विभाग की टीम : शुक्रवार सुबह ही सहायक निदेशक वासुदेव मिगलानी के नेतृत्व में टीम जिला अस्पताल परिसर पहुंची। वहां उन्होंने लक्ष्मी मेडिकोज दुकान की जांच की तो पता लगा कि दुकान में यूरिया ही नहीं है। बाहर बिखरा यूरिया को देख अधिकारियों को शक हुआ तो उन्होंने यूरिया कारोबारी ज्ञान अरोड़ा को बुलाकर पूछताछ की। उसने स्वीकार किया कि रात को उसी ने यूरिया रखवाया था। फिर रातोंरात ही उसे उठा भी लिया। उसकी स्वीकारोक्ति के बाद कृषि टीम ने बाहर बिखरे यूरिया का सैंपल ले लिया। दस्तावेजों की जांच हुई तो पता लगा कि कारोबारी अरोड़ा ने मेडिकल शॉप को गोदाम के रूप में रजिस्टर्ड ही नहीं करवा रखा।

रात को ही करते जांच तो जब्त होती यूरिया : भास्क रकी पड़ताल में खुलासा हुआ कि कारोबारी ज्ञान अरोड़ा ने जिस मेडिकल शॉप को यूरिया का गोदाम बना रखा है। वह दरअसल कृषि विभाग के रिकार्ड में दर्ज ही नहीं है। यानी वहां अवैध रूप से यूरिया का स्टाक किया जा रहा था। कृषि विभाग रात को ही गोदाम की जांच करता तो अधिकारियों को 100 बैग यूरिया जब्त करना पड़ता, साथ ही गोदाम को सीज करके लाइसेंस भी निलंबित हो सकता था।

भास्कर द्वारा सूचना देने के 14 घंटे बाद पहुंचे अधिकारी
आए थे 500, रिकार्ड में 300, कहां गए 200 बैग?
विभागकी टीम ने यूरिया कारोबारी ज्ञान अरोड़ा के गोदाम पर यूरिया की जांच के लिए पहुंची। अरोड़ा ने जो रिकार्ड पेश किया, उसके मुताबिक, गुरुवार को उसने 300 बैग यूरिया मंगाया था। वह यूरिया स्टाक रजिस्टर में दर्ज था। बड़ा सवाल यह है कि गुरुवार रात भास्कर ने अरोड़ा से बातचीत की थी तो उसने 500 बैग मंगाने की बात कही थी। अगर 500 बैग यूरिया आया था तो 200 बैग कहां गायब हो गया। इस सवाल का जवाब कृषि विभाग खोज पाया और ही कारोबारी बता पाया। जांच के बाद कृषि विभाग की टीम ने कारोबारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर ली। उससे तीन दिन में जवाब मांगा गया है।

किसान बोले, विभाग करा रहा है कालाबाजारी : भास्कर ने यूरिया के खेल को लेकर भास्कर से बातचीत की तो उनका आरोप था कि यूरिया की जिलेभर में कालाबाजारी कराई जा रही है और इसमें कृषि विभाग भी मिला हुआ है। किसान करण सिंह ने बताया कि 15 दिन से श्रीगंगानगर रहा था। लेकिन यूरिया नहीं मिल रहा था। शुक्रवार को एक कारोबारी से 283 रुपए में मिलने वाला यूरिया 400 रुपए में खरीद लिया। किसान सुरेंद्र अरोड़ा ने कहा कि गांवों में तो कई कारोबारी यूरिया के एक बैग के 400 से 500 रुपए तक वसूल रहे हैं।
अधिकारियों ने माना- रात को रखा गया था यूरिया : ''शुक्रवार सुबह यूरिया कारोबारी की जांच की थी। रात को मेडिकल शॉप में यूरिया रखवाया गया था, जो गलत है। देर रात इसे हटा भी लिया गया। यूरिया हटाने का कारण वह बता नहीं पा रहा। कारोबारी की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उसे नोटिस जारी किया है। जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो उसका लाइसेंस निलंबित किया जाएगा।'' वासुदेव मिगलानी, सहायक निदेशक, कृषि विभाग ।

- दुकान में नहीं मिली तो बाहर बिखरी यूरिया का लिया सैंपल
- कारोबारी को नोटिस, तीन दिन में मांगा जवाब
(किसानों का आरोप- कृषि विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही यूरिया की कालाबाजारी।)