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निकाय चुनाव का उदघोषणा पत्र भ्रमपूर्ण, सुधार किया जाए : हाईकोर्ट
निकायचुनाव में श्रीगंगानगर से निर्दलीय प्रत्याशी यश मिड्ढा की ओर से दायर याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उदघोषणा पत्र में संशोधन करने के आदेश दिए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने माना है कि निकाय चुनावों में आवेदन के साथ संलग्न आपराधिक पृष्ठभूमि का उदघोषणा पत्र अधूरा है।
उस काॅलम में संपूर्णता का अभाव है। ऐसे में कोई भी अभ्यर्थी अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की सही स्थिति प्रस्तुत नहीं कर पाता। यह आदेश न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने सुनाया है।
श्रीगंगानगर निवासी यश मिड्ढा ने वार्ड 21 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया था। प्रशासन ने उसका नामांकन खारिज कर दिया था।
जिस पर मिड्ढा ने अधिवक्ता संजीत पुरोहित के माध्यम से हाईकोर्ट में नामांकन पत्र खारिज करने को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि प्रार्थी ने पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था।
इसके साथ उदघोषणा पत्र में बताया था कि उसके खिलाफ श्रीगंगानगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 30 सितंबर 2014 को आईपीसी की धारा 452, 323 तथा 34 के तहत संज्ञान लिया है। लेकिन आरोप तय नहीं किए हैं।
बावजूद इसके आरओ ने उसका नामांकन पत्र खारिज कर दिया। इस मामले में राज्य सरकार रिटर्निंग अधिकारी का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था।
हाईकोर्ट ने अब अपने विस्तृत फैसले में याचिका खारिज कर दी, लेकिन याचिकाकर्ता की यह दलील मान ली कि चुनाव आयोग का उद्घोषणा पत्र भ्रम पैदा करता है।