श्रीगंगानगर. एक ठेकेदार ने सभापति को बताया कि उसने पांच साल में कमीशन नहीं दिया तो उसको सिर्फ 3 काम ही मिले थे। बाकियों 30 काम मिले थे। इस बात पर अन्य ठेकेदार ने सभी की पोल खोलते हुए बताया कि ठेकेदारों को काम करने के लिए क्या करना पड़ता है।
एक ठेकेदार ने कहा था कि फलां काम मुझे दे तो 5 प्रतिशत कमीशन दे दूंगा तो दूसरे ने कहा था कि दस प्रतिशत कमीशन मैं दूंगा, तीसरे ने जब 12 प्रतिशत कमीशन की ऑफर दी तो उसे काम आवंटित हो गया था। अन्य ठेकेदार वंचित रह गए।
ठेकेदारों की आपस में एक-दूसरे की पोल खोलने से उजागर हुआ कि पांच साल के कार्यकाल में कमीशन के लिए निर्माण कार्यों में किस कदर धांधली हुई है। टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की पारदर्शिता नहीं बरती गई थी। ठेकेदारों के आपस में उलझने के दौरान सभापति ने मीडियाकर्मियों को बैठक से बाहर जाने को कह दिया।