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दुकानें मेडिकल स्टोर्स की चल रहे दूसरे व्यापार
जिलाअस्पतालपरिसर के अंदर स्थित दुकान में भारी मात्रा में यूरिया का स्टॉक मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में है। अस्पताल निर्माण के समय मरीजों की सुविधा के लिए बनाई गई कई दुकानों में मेडिकल स्टोर की जगह दूसरे व्यापार चल रहे हैं। खास बात यह है कि इन दुकानों में कितनी चल रही हैं, कितनी बंद पड़ी हुई है। कौन सी दुकान किसे और कब बेची जा रही है। इस संबंध में किसी को भी कुछ पता नहीं है। अस्पताल प्रशासन के पास इनसे संबंधित कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
दुकानें46, खुलती 18
वर्ष1995 में ट्रस्ट द्वारा अस्पताल परिसर के अंदर मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर्स ढूंढ़ना पड़े, इसके लिए मेडिकल स्टोर्स और जांच के लिए 46 दुकानें और 2 दुकानें शौचालय के लिए बनाई गई थी। राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी के सदस्य गोपाल तरड़ ने बताया कि साल 2011 में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा और जांच योजना शुरू होने के बाद यहां दुकानों में मरीज बहुत कम संख्या में आने लगे। दुकानदारी प्रभावित होने पर लोगों ने दुकानें बेचनी शुरू कर दी। मौजूदा समय में परिसर में केवल 18 दुकानों में ही मेडिकल स्टोर्स लैब चल रही हैं जबकि 28 दुकानें बंद पड़ी हैं। इससे कुल 30 दुकानें ऐसी हैं जिनमें कई दूसरे व्यापार चल रहे हैं।
दुकान का मािलक संदीप कुमार, कब्जा यूरिया कारोबारी के पास मौजूदासमय में परिसर की सभी दुकानों के संचालक बदले हुए हैं। शुरुआत में सबसे पहले ये दुकानें जिन्हें आवंटित हुई थी, उसके बाद से अब तक दुकानों के कई मालिक बदले। लेकिन इसका लेखा जोखा रखने की जरूरत किसी ने नहीं समझी। परिणामस्वरूप बंद पड़ी कई दुकानों में अन्य दूसरे व्यापार चोरी छिपे चल रहे हैं। यूरिया के स्टॉक वाली दुकान नंबर 20 पहली बार जी ब्लॉक निवासी संदीप कुमार को आवंटित हुई। उसके बाद अब उसे कौन संचालित कर रहा है। इसका रिकॉर्ड तो अस्पताल प्रशासन के पास है और ही आरएमआरएस के पास। अस्पताल प्रशासन के पास इन दुकानों के बारे में केवल नीलामी के समय के रिकॉर्ड हैं लेकिन वे रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे हैं, मगर कहां रखे हैं उन्हें भी नहीं मालूम।
^ये दुकानें तो ट्रस्ट की थी, फिर आरएमआरएस के पास गई। दुकानें बाद में किसको बिकती रहीं इसका रिकॉर्ड तो नहीं है। और सबसे पहले किसे आवंटित हुई इसका रिकॉर्ड ढूंढ़ना पड़ेगा। पी.सी.खन्ना, मैनेजर, राजस्थानमेडिकल रिलीफ सोसायटी।
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