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शहर को साफ रखने के जिम्मेदार विभाग खुद ही गंदगी से अटे

7 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. शहर में स्वच्छता और सफाई को लेकर बैठकें हो रहीं है, विभागीय स्तर पर दावे भी किए जा रहे हैं। जमीनी हकीकत कुछ अलग है। नगरपरिषद की बात करें या फिर जिले भर में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिम्मेदार सीएमएचओ की। अधिकांश सरकारी कार्यालयों में ही सफाई का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। कहीं पास से गुजर रहे नालों में गंदगी पसरी है तो कहीं परिसर में कूड़े करकट का ढेर लगा है। ‘भास्कर’ टीम ने शहर से पहले विभागों का सफाई व्यवस्था जायजा लिया। स्वच्छता, सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिम्मेदार विभागों के हालात ही बदहाल नजर आए।

जिला परिषद : सफाई व्यवस्था बदहाल

जिला परिषद परिसर के चारों तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। इन झाड़ियों में मच्छरों के साथ-साथ कचरे के ढेर पड़े हैं। वहीं इस कार्यालय के मुख्य दरवाजे पर गंदा पानी पसरा हुआ है। इस गंदे पानी में मच्छर पनपते दे रहे हैं। यहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह बदहाल नजर आई।

पंचायत समिति कार्यालय श्रीगंगानगर की दीवार के पीछे वाली दीवार को कचरा संग्रह करने की जगह बना रखा है। कार्यालय के बिल्डिंग के चारों ओर कहीं भी कचरा-पात्र नहीं है। परिसर के मुख्य द्वार के बाहर भी गंदगी फैली है।

नगरपरिषद: कचरा पात्र यहां भी नहीं

नगरपरिषद के पास 900 सफाई कर्मचारी हैं और शहर में सफाई कराने के लिए सालना 12 से 15 करोड़ का बजट है। शहर के 50 वार्डों की सफाई और सौंदर्यीकरण भी इसी संस्था की है। परिसर में कहीं कचरा-पात्र नहीं है। कचरे का ढेर खुले में लगाया जाता है।

सीएमएचओ कार्यालय: जगह-जगह कचरे के ढेर

वहीं सभी विभागों की तरह सीएमएचओ ऑफिस में सफाई व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है।यहां भी जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं और बड़ी-बड़ी झाडिय़ां उगी हुई हैं। शहर के स्वास्थ्य विभाग ही स्वच्छ नहीं था तो जिला कैसे स्वच्छ करते होंगे।

जिला कलेक्ट्रेट: पार्क कूड़े की भेंट चढ़ा

जिले की 19 लाख की आबादी की तमाम व्यवस्थाओं की रिपोर्ट यहीं होती है। कार्यालय में स्थित एक मात्र पार्क कूड़े दान की भेंट चढ़ चुका है। आलम ये है कि पार्क के बीच हिस्से को छोड़कर हर तरफ कचरे के ढेर हैं। पार्क से चंद कदम की दूरी पर कलेक्टर का कक्ष है। इसी दो दिशाओं में वकीलों के चेंबर हैं। जहां हर रोज सैकड़ों लोगों की आवाजाही रहती है।