श्रीगंगानगर. मनुष्य को हमेशा अपने कर्म पर ध्यान होना चाहिए, क्योंकि कर्म ही उसकी सफलता की सीढ़ी होते हैं। उन्होंने गीता का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने भी कहा है कि कर्म करते चलो और फल की चिंता मत करो, आपका गुरु अगर आपको कोई आदेश देता है तो कभी उसकी अवहेलना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वह हमेशा अपने शिष्य का भला ही सोचता है। जीवन में आगे बढ़ते रहने के लिए गुरु की बात को गांठ बांधकर रखना चाहिए।
अगर हम किसी के साथ मिलकर कोई व्यापार या अन्य कोई काम करते हैं तो कभी भी एक दूसरे के साथ बेईमानी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जब हमारे मन में बेईमानी की भावना जाती है तो उसी पल से हमारी क्षति होनी शुरू हो जाती है।
ब्रह्म ऋषि ने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले अपने घर और जन्म भूमि से बाहर निकलना चाहिए। क्योंकि जो आपकी जन्म स्थली है वहां आपको लोग ज्यादा तवज्जो नहीं देते।
रात 12:15 पर दिया बीज मंत्र
गुरु महिमा पाने और उनसे मिलने वाले बीज मंत्रों के लिए श्रद्धालु देर रात तक प्रतीक्षा करते रहे। रात 12.15 बजे ब्रह्मऋषि ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को बीज मंत्र प्रदान किए।
35 यूनिट रक्तदान
अंधविद्यालय परिसर में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण धाम ट्रस्ट की ओर से सुबह 9 से शाम 5 बजे तक रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। इसमें 35 यूनिट रक्तदान किया गया। बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिए लंगर चलता रहा।
बेईमानी नहीं कराे
कर्म का ध्यान रखो
गुरु का सम्मान करो
घर का मोह छोड़ो