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लड़कियां अपनी कामयाबी से बदलें लोगों की सोच

7 वर्ष पहले
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नगर संवाददाता| श्रीगंगानगर.

बेटियोंको जिंदगी अपने तरीके से जीनी चाहिए, मगर इसके साथ ही उन्हें अपने दायित्व भी याद रखने चाहिए। समाज में अभी भी बेटियों को उतनी स्वतंत्रता से जीने की आजादी नहीं मिली है, जितनी मिलनी चाहिए। मगर उन्हें अपने निर्णयों और कामयाबी के जरिए ही लोगों की सोच को बदलना पड़ेगा। यह बात चौ. बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय में आयोजित वैचारिक कार्यक्रम बेटियां- वक्त भी हमारा, स्वर भी हमारा के दौरान दिल्ली से आई मुख्य वक्ता डॉ. अंजना बख्शी ने कही।

कार्यक्रम का आयोजन युवा विकास मंडल के तत्वावधान में किया गया। मां सरस्वती की वंदना और उनकी प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित इसकी शुरुआत की गई। इसके बाद समाज सेविका और साहित्यकार डॉ. अंजना ने छात्राओं काे भविष्य में सफलता प्राप्त करने के मूल मंत्र बताए। उनका कहना था कि समाज के अधिकतर लोगों की यह सोच होती है कि बेटियों को ज्यादा पढ़ा लिखाकर क्या करना है, लड़कियों ने शादी के बाद घर परिवार को ही संभालना है। कई लड़कियां भी इसी सोच को अपना लेती हैं, जो बिलकुल गलत है। आज के दौर में लड़कियां लड़कों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। लड़कियों को किसी से डरने की जरूरत नहीं है। बस उन्हें इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि वह खुद गलत हों, अगर वह खुद गलत नहीं होंगी तो उनके बारे में गलत सोचने की किसी की हिम्मत भी नहीं होगी। डॉ. बख्शी ने छात्राओं के सवालों और शंकाओं का निवारण किया। कार्यक्रम में बताया गया कि डॉ. अंजना ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पीएच.डी. किया है, साथ ही उन्होंने गुलाबी रंग की देह सहित कई पुस्तकों की रचना की है। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. विजय लक्ष्मी महेंद्रा, अमृता जैन, सुभाष सिंगाठिया, डॉ. तौफीक हुसैन और अन्य लोग मौजूद थे।

गोदारा कॉलेज में छात्राओं को संबोधित करती मुख्य वक्ता डॉ. अंजना बख्शी।