श्रीगंगानगर. बंसीवाले का जादू निराला है जो काेई भी इसे सुनता था वह चाहे इंसान हो या फिर पशु बस सुनता ही रह जाता था। यह बात एल ब्लाक स्थित हनुमान मंदिर में स्वामी ब्रह्मदेव के सानिध्य में चल रही श्रीमदभागवत कथा सप्ताह के दौरान स्वामी मुदगल शास्त्री ने कही।
इस दौरान सैकड़ों लोगों ने कथा का आनंद लिया। कथा के दौरान बताया गया कि बालपन में श्री कृष्ण जब अपनी एक लाख गायों को चराने जाते थे तो शाम को उनको वापस लाने के लिए बस अपनी बांसुरी बजाना शुरू कर देते थे। उनकी मुरली की धुन सुनकर सारी गाएं जहां भी होती थीं भागती हुई उनके पास चली आती थीं।
वहां से गुजरनी वाली ग्वालिनें भी बंसी की धुन में मंत्र मुग्ध हो जाती थीं और अपना सारा काम छोड़ कर घंटों उनकी बांसुरी सुना करती थीं। शाम को जब वह बगैर अपना माखन बेचे घर पहुंचती थी तो घर पर उन्हें फटकार सुननी पड़ती थी। वह कहती थी कि बंसी वाले तेरी बंसी का जादू निराला है जाे हमें कोई काम ही नहीं करने देता है।
मनुष्य को हमेशा मंगल की ही कामना करनी चाहिए कभी भी अमंगल की बात नहीं सोचनी चाहिए। स्वामी ब्रह्मदेव और मुदगल शास्त्री को माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया गया।