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माया मोह में फंसा रहता है मनुष्य

7 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. लगन तुम से लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा... तुम्हे अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा...., हरे कृष्णा.. हरे कृष्णा.. कृष्णा.. कृष्णा.. हरे हरे.. जैसे भजनों के साथ भक्ति रस में सराबोर होकर झूमते श्रद्धालु। मंगलवार को नई धानमंडी स्थित श्री हनुमान मंदिर में संगीतमय भागवत कथा के तीसरे दिन यही माहौल था।
आचार्य संत प्रसाद मिश्रा ने कथा वाचन किया। उन्होंने बताया कि मनुष्य सारी उम्र जीवन माया मोह में फंसा रहता है। वह जहां भी जाता है यह माया उसके साथ ही जाती है। मनुष्य कभी कभी इस माया के चक्कर में फंस ही जाता है। जो मनुष्य इसके फेर से निकलने में सफल हो जाते हैं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती, जिसके बाद आत्मा परमात्मा से मिलकर उसमें सदा के लिए विलीन हो जाती है। साथ ही वह जीवन मरण के बंधनों से मुक्त हो जाता है।
मगर यह मोक्ष रूपी मंजिल इतनी आसानी से प्राप्त नहीं होती है। इसके लिए मनुष्य को कड़ा तप करना पड़ता है। कथा उपरांत शाम 7.30 बजे मंदिर में आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया।