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परिजनों को इंतजार था, डेरे में सेवा कर लौटेंगे, पर मौत की खबर आई

6 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर| श्रीगंगानगर.

जवाहरनगरस्थित प्रेम अरोड़ा के मकान का दृश्य किसी से देखा नहीं जा रहा था। यह किसी ने नहीं सोचा था कि डेरा राधा स्वामी में सेवा के लिए गया परिवार इस तरह वापस लौटेगा। जैसे ही शाम प्रेम का शव अपने मकान पर लाया गया, परिजन फूट-फूट कर रोने लगे। रिश्तेदार भगवान की मर्जी कह सांत्वना दे रहे थे। इसी बीच सूचना मिली कि अस्पताल में प्रेम की प|ी हर्षा की भी मौत हो गई तब माहौल और गमगीन हो गया। रात करीब 8 बजे एंबुलेंस से हर्षा का शव घर लाया गया।

हादसे में प्रेम के पिता विशनदास (75), मां राजरानी (65), बेटा वंश (9) और बेटी पलक्षा (6) घायल हो गए। जहां राहगीरों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस से घायलों को जिला अस्पताल भेजा।

हादसे की जानकारी मिलते ही अस्पताल पहुंचे घरवाले घायलों को निजी अस्पताल ले गए। जहां प्रेम की मां राजरानी की दाहिनी आंख पिता विशनदास के सिर पर चोट आने से आईसीयू में इलाज चल रहा है। जबकि बेटा बेटी को प्राथमिक उपचार के बाद वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। प्रेम के घर अस्पताल के बाहर भी देर शाम तक मोहल्ले परिचितों की भीड़ लगी रही।

बच्चोंकाे लेकर चिंता

यहांघर के बाहर अनेक परिचित खड़े थे। सबकी आंखों में आंसू थे तथा हर किसी के बीच एक ही चर्चा थी कि भगवान ने अच्छा नहीं किया। दंपती की मौत के बाद उनके दो छोटे बच्चे वंश (9) और बेटी पलक्षा (6) का क्या होगा।

कौनउनका ध्यान रखेगा

हर्षाबच्चों को स्कूल के लिए तैयार करती थी। स्कूल से लौटते समय घर के बाहर खड़ी इंतजार करती थी, लेकिन अब बच्चों को कौन दुलार करेगा। प्रेम मेलमिलाप के स्वभाव का था, हर किसी से घुलमिल जाता था। बच्चाें का भी बेहद ध्यान रखता था, शाम को कभी बच्चों को सामने पार्क में भी खेलने के लिए ले जाता था। दोनों के भगवान के चले जाने से बच्चे अब अनाथ हो गए हैं।

बड़ेभाई पर जिम्मेदारी

प्रेमअरोड़ा के बड़े भाई मोहनलाल का यहां एकता पार्क के पास पास मकान है। वे जिला मुख्यालय पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में तकनीकी सहायक के पद पर कार्यरत हैं। प्रेम के परिवार की जिम्मेदारी उन पर गई है उनका भी हादसे की सूचना के बाद से बुरा हाल है, लेकिन परिवार के बड़े होने के नाते वे ढांढ़स बंधाते रहे।

जिला अस्पताल में रेफर करने के बाद निजी अस्पताल में ले जाते परिजन।