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निर्यात को बढ़ावा देने वाली फसलें तैयार कराने का आह्वान

6 वर्ष पहले
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एग्रीकल्चर रिपोर्टर| श्रीगंगानगर

फरीदाबादस्थित केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र के अवर वनस्पति संरक्षण सलाहकार डॉ. राम आसरे ने कहा है कि अब किसानों के समक्ष अधिक उत्पादन नहीं बल्कि बेहतर जैविक उत्पाद की चुनौती है। इसे कृषि अधिकारी एवं पर्यवेक्षक किसानों के साथ मिलकर मिशन के रूप में काम करेें तो पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बीज से लेकर उसके उत्पादन तक फसल की हर अवस्था में वातावरण के जैविक एवं अजैविक तत्वों को ध्यान में रखते हुए कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विश्लेषण के आधार पर जैव उत्पादकों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारें अभियान चला रही हैं। आईपीएमसी इस पर जोर दे रहा है। वे यहां आईपीएमसी की मासिक कार्यशाला में उपस्थित ट्रेनी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आप यहां से सीखकर प्रत्येक गांव में 5-6 किसानों को ट्राइकोडरमा, ट्राइकोगामा, लाइट ट्रेप, एनपीवी, फैरोमेन ट्रेप आदि के निर्माण विधि बताएं। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि इन्हें बनाने की विधि श्रीगंगानगर केंद्र से प्राप्त कर सकते हैं।

बुधवार को स्थानीय केवीके प्रभारी डॉ. बीएस सिद्धू, प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. जीके बुनकर, डॉ. केएस कपूर, रायपुर से आए डॉ. सूरज चौधरी, पोर्टब्लेयर के आईपीएमसी से डॉ. यूके नायक, आदि ने भी संबोधित किया। बाद में वैज्ञानिकों ने कृषि अनुसंधान केंद्र एवं 11 ईईए में खेत में जाकर फसलों का अवलोकन किया।

श्रीगंगानगर। संरक्षण सलाहकार डॉ. राम आसरे एवं अन्य अधिकारी।