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ओपीडी पर्ची के 5 की बजाय लिए जाएंगे 10 रुपए

7 वर्ष पहले
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श्रीगंगानगर. जिला अस्पताल में डॉक्टर को ओपीडी में दिखाने के लिए आने वाले मरीजों को जल्द ही ओपीडी पर्ची के 5 के बजाए 10 रुपए देने पड़ेंगे। आयुष चिकित्सालय में मरीजों को हो रही असुविधा के दृष्टिगत उनके लिए अलग से पर्ची काउंटर बनाया जाएगा। कुछ ऐसे ही अहम फैसले शनिवार को जिला अस्पताल में लगभग 7 माह बाद हुई राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी (आरएमआरएस) की बैठक में लिए गए। अध्यक्षता कलेक्टर आरएस जाखड़ ने की।

यूं तो आरएमआरएस की बैठक तय समय सुबह साढ़े 11 बजे शुरू होनी थी। लेकिन इस बीच कलेक्टर के बसंती चौक स्थित एक विद्यालय में निरीक्षण के लिए जाने पर बैठक दोपहर 1 बजे शुरू हो सकी। शुरुआत अस्पताल में लंबे समय से बंद पड़े शौचालयों संबंधी मुद्दे से हुई। इसके बारे में पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना ने पाइप टूटी होने की बात बताई और एनएचएम के बजट का हवाला दे दिया। पीएमओ ने बताया कि विभिन्न मद में मिशन का करीब 10 लाख रुपए बाकी है, जिस पर उन्होंने सख्त लहजे में निदेशक को पत्र लिखकर बजट मांगने की बात कही। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से सर्राफ कॉटेज संचालकों द्वारा 60 और 40 का अनुबंध होने के बाद भी रुपए देने का मुद्दा उठाया गया। कलेक्टर ने विवाद छोड़ बीच का रास्ता बताते हुए कहा कि संचालकों से अब तक नहीं दिए रुपए से अस्पताल में विकास कितना कराया गया, यह पूछा जाए।
इस बीच अस्पताल की आय बढ़ाने के लिए डीसी डॉ. प्रेम बजाज ने ओपीडी पर्ची 5 रुपए से बढ़ाकर 10 रुपए करने का प्रस्ताव दिया, जिस पर कलेक्टर ने सहमति जताते हुए पर्ची का रेट बढ़ाने की अनुमति दे दी।
वहीं, आईपीडी की पर्ची के लिए 10 से 20 करने के प्रस्ताव पर उन्होंने बीकानेर और हनुमानगढ़ जिले में स्थिति देख इस पर अगले माह चर्चा करने की बात कही। पीएमओ के अनुसार कलेक्टर की अभी औपचािरक सहमति िमली है। फाइल पर हस्ताक्षर के बाद ही नए रेट प्रभावी होंगे। गौरतलब है कि आरएमआरएस की इस बैठक से पूर्व 16 जनवरी 2014 को बैठक हुई थी। कलेक्टर जाखड़ की अध्यक्षता में यह पहली बैठक थी।
अस्पताल में स्टाफ डॉक्टर द्वारा अच्छा काम करने वाले को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। हर माह कैटेगरी में बेस्ट होने पर डॉ. को डॉक्टर ऑफ मंथ नर्सिंग स्टाफ और गार्ड को नर्सिंग या गार्ड ऑफ मंथ का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। बेस्ट डॉक्टर को 1100 रुपए स्टाफ और गार्ड को 500 रुपए मिलेंगे। इसका खर्चा समाजसेवी संस्था की मदद से उठाया जाएगा।

पेंशनरों के लिए पुराने अस्पताल से यहां शिफ्ट होगी दुकान

बैठक में पेंशनरों के लिए परेशानी का भी मुद्दा उठा, जिसमें मेंबर गोपाल शर्मा ने बताया कि अस्पताल में पेंशनरों को दवा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें सीएमएचओ के कार्यालय परिसर में जाना पड़ता है। इस पर सहमति बनी कि परिसर में काफी समय से बंद पड़ी दुकान खुलेगी और सीएमएचओ परिसर की दुकान यहां शिफ्ट होगी। बदले में अस्पताल प्रबंधन केवल बिजली और पानी का किराया वसूल करेगा।